किरगी जल प्रदाय योजना में ठेकेदार की हिटलरशाही बदस्तूर जारी
हक मांगने पर आदिवासी पंप ऑपरेटरों को बनाया बंधक
कोरे स्टांप व नोटरी पर कराए जबरन हस्ताक्षर
अनूपपुर। किरगी जल प्रदाय योजना में कार्यरत आदिवासी श्रमिकों द्वारा न्यूनतम मजदूरी, बकाया वेतन और पीएफ की मांग करने पर कंपनी प्रबंधन द्वारा उन्हें बंधक बनाकर डराने-धमकाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि 29 अगस्त को कार्यालय में 9 आदिवासी पंप ऑपरेटरों को कई घंटों तक बंधक रखकर ₹50 के स्टांप पेपर एवं अन्य दस्तावेजों पर जबरन दस्तखत कराए गए है। नौकरी से निकालने की धमकी देकर मनमाने तरीके से नोटरी कराने की तैयारी की जा रही थी जिसमें 2 पंप ऑपरेटरो के जबरन हस्ताक्षर करवाए गए है, जिसे लेकर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की गुहार लगाई गई है।मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला अंतर्गत राजेंद्रग्राम क्षेत्र में किरगी जल प्रदाय योजना के तहत वर्ष 2018 से सेवाएं दे रहे आदिवासी श्रमिकों का शोषण लगातार गहराता जा रहा है। जब श्रमिकों ने संगठित होकर अपने विधिक अधिकारों, न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम भुगतान के संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया, तो निजी कंपनी के जिम्मेदारों ने वैधानिक समाधान निकालने के बजाय दमनकारी रास्ता अख्तियार कर लिया है। 29 अगस्त 2026 को दोपहर 1 से 4 बजे के बीच श्रमिकों को योजना कार्यालय में बुलाकर कमरे में बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। आरोप है कि प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने कमजोर आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि का फायदा उठाकर दबाव बनाया और नौकरी छीनने का भय दिखाकर सादे स्टांप पर हस्ताक्षर करवाए है। इस सुनियोजित कृत्य के जरिए कंपनी भविष्य में श्रमिकों की आवाज दबाने और जाली दस्तावेज तैयार करने की फिराक में है, जिससे पूरे क्षेत्र और मजदूर संगठन में रोष व्याप्त है।
हक की मांग पर दफ्तर में बंधक बनाकर डराने का आरोप
किरगी जल प्रदाय योजना में वर्षों से सेवा दे रहे 9 आदिवासी श्रमिकों ने जब अपने बकाया वेतन और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई, तो उन्हें समाधान देने के बजाय प्रताड़ित किया गया है। 29 अगस्त को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक उन्हें किरगी कार्यालय में जबरन रोककर रखा गया था। अधिकारियों ने बंद कमरे में दबाव बनाते हुए स्पष्ट धमकी दी कि यदि उन्होंने विरोध बंद नहीं किया तो उन्हें तत्काल नौकरी से बेदखल कर दिया जाएगा।
₹50 के स्टांप पेपर पर जबरन हस्ताक्षर और नोटरी करवा कूटरचना की आशंका
कार्यालय में बंधक बनाए गए श्रमिकों से बिना किसी विधिक प्रक्रिया और सहमति के ₹50 के स्टांप पेपर तथा पीएफ दस्तावेजों पर जबरिया दस्तखत करवाए गए है। श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें इन कागजातों की सामग्री पढ़ने तक नहीं दी गई है। उन्हें गंभीर अंदेशा है कि इन हस्ताक्षरित स्टांप पेपरों पर कंपनी मनगढ़ंत शर्तें जोड़कर कूटरचित अनुबंध या घोषणा पत्र तैयार करेगी, जिससे भविष्य में उनके वैधानिक श्रम अधिकारों का पूरी तरह हनन हो जाएगा।
गैरकानूनी तरीके से नोटरी कराने की तैयारी में निजी कंपनी
शिकायत में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि श्रमिकों से दबाव में लिए गए हस्ताक्षरों के आधार पर कंपनी प्रबंधन अब अवैध तरीके से जबरन दबाव डाल कर नोटरी करवाने के प्रयास में जुटा है जिसमें 2 पंप ऑपरेटरो से अभी तक दबाव में हस्ताक्षर करवा लिए गए है। बिना श्रमिकों की उपस्थिति और स्वतंत्र सहमति के इन दस्तावेजों को कानूनी जामा पहनाने की साजिश रची जा रही है। पीड़ितों ने पुलिस से मांग की है कि किसी भी प्रकार की फर्जी नोटरी और छेड़छाड़ की निष्पक्ष जांच हो तथा मूल स्टांप पेपर को तुरंत जब्त किया जाए।
आदिवासी श्रमिकों की मजबूरी का फायदा उठाकर दोहरा शोषण
पीड़ित पंप ऑपरेटर अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आते हैं और बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से संघर्ष कर रहे हैं। ठेकेदार कंपनी प्रबंधन द्वारा उनकी इसी लाचारी का अनुचित लाभ उठाया जा रहा है। श्रमिकों का कहना है कि उनकी जातिगत और सामाजिक स्थिति को निशाना बनाकर लगातार अपमानित किया गया और डराया-धमकाया गया है। इस मामले में पुलिस से मांग की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी सख्त जांच की जाए और कार्यवाही की जाए।
पुलिस से एफआईआर, मूल दस्तावेज जब्ती और सुरक्षा की मांग
श्रमिकों ने राजेंद्रग्राम थाना प्रभारी को विस्तृत लिखित आवेदन सौंपकर बीएनएस (BNS) और संबंधित श्रम कानूनों के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पीड़ितों ने जबरन हस्ताक्षरित ₹50 के मूल स्टांप पेपर को तुरंत पुलिस अभिरक्षा में लेने और सभी श्रमिकों के पृथक बयान दर्ज करने का आग्रह किया है। साथ ही शिकायत के बाद कंपनी या ठेकेदार द्वारा काम से निकाले जाने और अन्य प्रताड़ना से विधिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।
































































