15 वार्डों में सफाई व्यवस्था के दावे पर सवाल, कई गली-मोहल्लों में पसरी गंदगी
25 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी के बीच वर्तमान व्यवस्था पर उठे सवाल, स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत तलाशने की जरूरत

अनूपपुर/बरंगवा-अमलाई। नगर परिषद बरंगवा-अमलाई में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भले ही लगातार अभियान चलने और सभी 15 वार्डों तक सफाई व्यवस्था पहुंचने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन नगर के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था की स्थिति इन दावों से अलग नजर आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जगह-जगह कचरा, नालियों में जमा गंदगी और बारिश के बाद जलभराव जैसी समस्याएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर नियमित सफाई व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
नगर परिषद में सफाई कर्मचारियों की कमी को स्वीकार करते हुए 25 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि वर्तमान व्यवस्था पर्याप्त है और सभी 15 वार्डों में नियमित सफाई हो रही है, तो अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? कर्मचारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका, यह भी नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय है।
मुख्य मार्गों से आगे कब पहुंचेगी सफाई व्यवस्था?
नगर में स्वच्छता अभियान को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बावजूद नागरिकों का सवाल है कि सफाई व्यवस्था केवल प्रमुख मार्गों और दिखाई देने वाले क्षेत्रों तक सीमित न रहकर अंदरूनी गलियों और मोहल्लों तक कब प्रभावी रूप से पहुंचेगी।
कई स्थानों पर नियमित कचरा उठाव, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि सभी 15 वार्डों में नियमित सफाई व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है तो फिर नागरिकों को जगह-जगह गंदगी और कचरे की समस्या का सामना क्यों करना पड़ रहा है, इसका जवाब नगर परिषद को देना चाहिए।
25 कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी, लेकिन वर्तमान व्यवस्था का हिसाब कौन देगा?
नगर परिषद द्वारा 25 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी को स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम बताया जा रहा है। हालांकि, इससे पहले वर्तमान सफाई व्यवस्था की समीक्षा और उपलब्ध कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन भी जरूरी है।
नगरवासियों का सवाल है कि नगर परिषद में वर्तमान में कितने सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, 15 वार्डों के लिए प्रतिदिन कितने कर्मचारी उपलब्ध रहते हैं, किस वार्ड में कितनी बार सफाई होती है और कचरा उठाव की नियमित व्यवस्था क्या है—इन बिंदुओं पर सार्वजनिक जानकारी सामने आनी चाहिए।
बारिश ने खोल दी व्यवस्थाओं की पोल
हाल की बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव और पानी रुकने की स्थिति ने भी नगर की सफाई एवं जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बारिश के बाद मिट्टी डालकर समतलीकरण और पानी निकासी के प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन स्थायी जलनिकासी व्यवस्था के अभाव में हर बारिश में यदि वही समस्या दोहराती है तो केवल तत्काल राहत कितनी कारगर होगी, यह विचारणीय है।
नालियों में गंदगी और पानी रुकने की समस्या के कारण मच्छरों और अन्य कीट-पतंगों के पनपने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में केवल ब्लीचिंग पाउडर या दवा का छिड़काव करने के बजाय नालियों की नियमित सफाई और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था पर भी गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
स्वच्छता के दावों के बीच नागरिक पूछ रहे सवाल
नगरवासियों का कहना है कि स्वच्छता केवल प्रेस नोट, बैठकों और दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। यदि नगर परिषद वास्तव में सभी 15 वार्डों को स्वच्छ रखने के लिए प्रतिबद्ध है तो प्रत्येक वार्ड की सफाई व्यवस्था का सार्वजनिक निरीक्षण, सफाई का रोस्टर और शिकायतों के निराकरण की स्थिति भी सामने रखी जानी चाहिए।
नगर की स्वच्छता निश्चित रूप से प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन प्राथमिकता का वास्तविक मूल्यांकन कागजों और बयानों से नहीं बल्कि सड़कों, गलियों, नालियों और मोहल्लों की स्थिति से होना चाहिए।
जनता के सहयोग के साथ जवाबदेही भी जरूरी
स्वच्छता बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों को कचरा निर्धारित स्थान पर डालना चाहिए और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी नहीं फैलानी चाहिए। लेकिन नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा के साथ नगर परिषद की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नगरवासियों को उम्मीद है कि 25 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती की घोषणा केवल आश्वासन बनकर न रह जाए, बल्कि भर्ती के बाद प्रत्येक वार्ड में नियमित और दिखाई देने वाली सफाई व्यवस्था सुनिश्चित हो। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 वार्डों में निरंतर सफाई के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर गंदगी और अव्यवस्थाओं की शिकायतें क्यों बनी हुई हैं?
नगर परिषद को अब दावों से आगे बढ़कर आंकड़ों, नियमित निरीक्षण और जमीन पर दिखाई देने वाली व्यवस्था के माध्यम से अपनी स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर जनता के सामने रखनी होगी।































































