काशी, प्रयागराज, वृंदावन और अमरकंटक के 31 विद्वान ब्राह्मण कर रहे वैदिक मंत्रोच्चार

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  • अमरकंटक के जालेश्वर स्थित श्रीगुरु दत्तात्रेय संत सेवा आश्रम में सवा लाख श्रीसूक्त पाठ एवं दो लाख हवन का भव्य धार्मिक अनुष्ठान जारी
  • 19 नवंबर को हवन, कन्या भोज एवं विशाल नगर भंडारे के साथ होगा आयोजन का समापन

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की पावन धरा जालेश्वर स्थित श्रीगुरु दत्तात्रेय संत सेवा आश्रम में आश्रम के महंत श्री ब्रह्मगिरी जी महाराज के सानिध्य में सवा लाख श्रीसूक्त पाठ का भव्य धार्मिक अनुष्ठान 25 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 19 नवंबर 2026 तक निरंतर जारी है । इस आध्यात्मिक आयोजन में काशी (बनारस) , प्रयागराज , वृंदावन एवं अमरकंटक के कुल 31 विद्वान ब्राह्मण वैदिक विधि-विधान के साथ श्रीसूक्त का पाठ कर रहे हैं ।

आयोजन के अंतर्गत श्रीसूक्त पाठ के साथ दो लाख हवन आहुतियां अर्पित करने का संकल्प लिया गया है । मुख्य हवन की दो लाख आहुतियां दो दिनों में पूर्ण की जाएंगी । इसके अतिरिक्त दो दिनों तक लघु हवन का आयोजन भी किया जाएगा । संपूर्ण अनुष्ठान काशी (बनारस) के आचार्य राजन शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हो रहा है । वहीं पन्ना जिले के पवई ग्राम निवासी आचार्य राजेश पाठक भी आचार्य के रूप में धार्मिक अनुष्ठान में अपनी भूमिका निभा रहे हैं ।

अनुष्ठान के समापन अवसर पर 19 नवंबर को विधिवत हवन , कन्या पूजन , संत-ब्राह्मण प्रसाद एवं विशाल नगर भंडारे का आयोजन किया जाएगा जिसमें श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों की सहभागिता रहेगी ।

  • 33 वर्षों से आश्रम में निरंतर सेवा और साधना

महंत श्री ब्रह्मगिरी जी महाराज ने बताया कि इस पावन स्थान पर उन्हें निरंतर 33 वर्षों से सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है । इससे पूर्व वे तीन बार मां नर्मदा की परिक्रमा भी कर चुके हैं । उन्हें अमरकंटक क्षेत्र में लगभग 40 वर्षों से उनका जीवन मां नर्मदा की गोद में सेवा , साधना और भक्ति के बीच व्यतीत हो रहा है ।
उन्होंने कहा कि सवा लाख श्रीसूक्त पाठ एवं दो लाख हवन आहुतियों का यह विशाल धार्मिक अनुष्ठान मां नर्मदा जी की कृपा , माता दुर्गा और भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है । यह सब मातरानी की असीम कृपा है । उन्होंने इस आयोजन को अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना , सनातन परंपरा और धर्म के प्रति आस्था को निरंतर प्रोत्साहन मिलता है ।

जालेश्वर की पावन भूमि पर चल रहा यह वैदिक अनुष्ठान क्षेत्र में धार्मिक वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है । 19 नवंबर को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ इस धार्मिक आयोजन का समापन होगा ।

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