एमएसएमई को पीएसयू से जोड़ने की पहल: सीएमपीडीआई में दो दिवसीय वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू

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एमएसएमई को पीएसयू से जोड़ने की पहल: सीएमपीडीआई में दो दिवसीय वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू

खरीदार-विक्रेता संवाद से लेकर जीईएम और टीआरईडीएस तक की दी गई जानकारी, 15 एमएसएमई इकाइयों ने लगाए उत्पाद प्रदर्शनी स्टॉल

रांची, 9 सितंबर। मिनी-रत्न कंपनी सीएमपीडीआई, रांची और भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत एमएसएमई डेवलपमेंट ऑफिस, रांची के संयुक्त तत्वावधान में सीएमपीडीआई के रबीन्द्र भवन में दो दिवसीय ‘वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम-सह-प्रोडक्ट एग्जीबिशन-2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से जोड़ना, उनकी खरीद प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराना और कारोबारी अवसरों के लिए सीधा संवाद स्थापित करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह ने मुख्य अतिथि एवं सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक निलेन्दु कुमार सिंह के साथ किया। इस अवसर पर सीएमपीडीआई के निदेशक (तकनीकी/पीएंडडी) अजय कुमार, निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) नृपेन्द्र नाथ, निदेशक (तकनीकी/आरडीएंडटी, बीडी) आनंद मोहन सहित सीसीएल एवं सीएमपीडीआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी पंकज कुमार तथा एमएसएमई-डेवलपमेंट ऑफिस, रांची के निदेशक इंद्रजीत यादव (आईईडीएस) उपस्थित रहे।

सिर्फ खरीदार-विक्रेता बैठक नहीं, साझेदारी का मंच

सीएमपीडीआई के सीएमडी चौधरी शिवराज सिंह ने कहा कि वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम को केवल खरीदार और विक्रेता के बीच बैठक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह कॉरपोरेट और एमएसएमई के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने स्वदेशीकरण, नवाचार और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने में एमएसएमई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई की विशेषज्ञता को कॉरपोरेट और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की आवश्यकताओं के साथ जोड़कर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

सीएमपीडीआई की विभिन्न सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गवेषण एवं जियोमैटिक्स से लेकर पर्यावरण संबंधी सेवाओं और माइन क्लोजर तक कई क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपनी विशेषज्ञता और क्षमताओं का उपयोग करते हुए स्थानीय स्तर की इकाइयों से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यम बनने का आह्वान किया।

आत्मनिर्भर भारत में एमएसएमई की अहम भूमिका

मुख्य अतिथि सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक निलेन्दु कुमार सिंह ने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्यम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने एमएसएमई उद्यमियों को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि बदलती तकनीकी और कारोबारी जरूरतों के अनुरूप उद्यमियों को अपने उत्पादों एवं सेवाओं में लगातार सुधार करना चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने और पीएसयू अधिकारियों के साथ संवाद के माध्यम से अपनी कारोबारी संभावनाओं को समझने की अपील की।

पीएसयू अधिकारियों से सीधे संवाद का अवसर

एमएसएमई डेवलपमेंट ऑफिस, रांची के निदेशक इंद्रजीत यादव ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों को विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर उपलब्ध करा रहा है। इससे उद्यमी संबंधित संस्थानों की आवश्यकताओं, खरीद प्रक्रियाओं और वेंडर बनने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

सीसीएल एवं सीएमपीडीआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी पंकज कुमार ने कहा कि सतर्कता जागरूकता अभियान-2026 के तहत आयोजित यह कार्यक्रम सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

महिला उद्यमियों से भी आगे आने का आह्वान

सीएमपीडीआई के निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) नृपेन्द्र नाथ ने कहा कि कार्यक्रम एमएसएमई को खरीदारों और कॉरपोरेट संस्थानों के साथ सीधे संवाद करने तथा उनकी आवश्यकताओं को समझने के लिए उपयोगी मंच प्रदान करता है। उन्होंने विशेष रूप से महिला उद्यमियों से बढ़-चढ़कर भागीदारी करने और उपलब्ध कारोबारी अवसरों का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय का विस्तार करने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र के अंत में सीएमपीडीआई के महाप्रबंधक (सामग्री प्रबंधन) मनोज उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, अधिकारियों, आगंतुकों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

जीईएम और टीआरईडीएस की खरीद प्रक्रिया समझी

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र एवं खरीदार-विक्रेता मीट में सीएमपीडीआई, सीसीएल, बीएसएल/सेल बोकारो, हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न रेलवे, गेल, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड तथा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने संबंधित संस्थानों की खरीद प्रक्रिया, जीईएम पर खरीद एवं वेंडर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी एमएसएमई प्रतिनिधियों को दी।

इसके साथ ही उद्यमियों को ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। सवाल-जवाब सत्र के दौरान एमएसएमई उद्यमियों ने अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं और व्यावसायिक प्रक्रियाओं से संबंधित शंकाओं का समाधान किया।

दूसरे दिन कई संस्थानों के अधिकारी देंगे जानकारी

कार्यक्रम के दूसरे एवं अंतिम दिन मेकॉन, यूसीआईएल, सिडबी, एनएसएसएच/एनएसआईसी रांची सहित अन्य संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी तकनीकी सत्र एवं खरीदार-विक्रेता मीट में शामिल होंगे। इन सत्रों में संबंधित संस्थानों के प्रोक्योरमेंट विभाग, खरीद प्रक्रिया और वेंडर के लिए उपलब्ध अवसरों के संबंध में प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

एमएसएमई डेवलपमेंट ऑफिस, रांची की ओर से केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा एमएसएमई के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं एम1एक्सचेंज और इंवाइसमार्ट के वरिष्ठ अधिकारी टीआरईडीएस से जुड़ी प्रक्रिया और उसके लाभों के बारे में उद्यमियों को जानकारी देंगे।

15 एमएसएमई इकाइयों ने लगाए उत्पाद प्रदर्शनी स्टॉल

वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम में कुल 5 सार्वजनिक क्षेत्र/सरकारी संगठनों और 15 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम इकाइयों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है। इन स्टॉल के माध्यम से उद्यमियों को अपने उत्पादों और क्षमताओं को संभावित खरीदारों एवं संस्थागत प्रतिनिधियों के सामने प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

आयोजन में 200 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने तकनीकी सत्र में भाग लिया। कार्यक्रम में सीधे संवाद, प्रस्तुतियों और सवाल-जवाब के माध्यम से उद्यमियों को सरकारी खरीद व्यवस्था, वेंडर रजिस्ट्रेशन, जीईएम, टीआरईडीएस तथा पीएसयू के साथ कारोबारी अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। यह आयोजन एमएसएमई इकाइयों के लिए बड़े सार्वजनिक उपक्रमों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने और अपने कारोबार को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया।

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