अवैध खनन पर अब और सख्त होगी कार्रवाई: एनसीएल व सीआईएसएफ को मिला जब्ती का वैधानिक अधिकार
एमएमडीआर अधिनियम की धारा 21(4) में संशोधन, अवैध खनन, परिवहन में प्रयुक्त वाहन, मशीनें और खनिज किए जा सकेंगे जब्त
सिंगरौली। कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण विधिक कदम उठाया है। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) की धारा 21(4) में संशोधन के बाद नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अधिकृत अधिकारियों को अवैध रूप से उत्खनित खनिज, उसके परिवहन में प्रयुक्त वाहन, मशीनरी, उपकरण एवं अन्य सामग्री को जब्त करने का वैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है। कोयला मंत्रालय की इस अधिसूचना को अवैध खनन के विरुद्ध एक बड़ा और प्रभावी कानूनी सुधार माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना वैधानिक अनुमति के किसी भूमि से खनिज का उत्खनन करता है, उसका परिवहन करता है अथवा ऐसे कार्य में किसी वाहन, मशीन, उपकरण या अन्य संसाधनों का उपयोग करता है, तो अधिकृत अधिकारी संबंधित खनिज के साथ-साथ उपयोग में लाए गए वाहन, मशीनरी एवं अन्य सामग्री को भी जब्त कर सकेंगे। इससे अवैध खनन में संलिप्त लोगों पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
संशोधित प्रावधानों के तहत एनसीएल की सभी उत्पादन परियोजनाओं में क्षेत्रीय नोडल अधिकारी (सुरक्षा) तथा क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एमएमडीआर अधिनियम की धारा 21(4) के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी बनाया गया है। इसी प्रकार सीआईएसएफ के सीनियर कमांडेंट, कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट तथा असिस्टेंट कमांडेंट भी अब इस अधिनियम के तहत जब्ती की कार्रवाई कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले अवैध खनन के मामलों में कई बार कार्रवाई की प्रक्रिया लंबी होने के कारण अपराधियों को राहत मिल जाती थी। अब एनसीएल और सीआईएसएफ के अधिकारियों को सीधे वैधानिक अधिकार मिलने से अवैध उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी। इससे कोयला क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और खनिज संपदा की सुरक्षा भी प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार एमएमडीआर अधिनियम की धारा 22, 23(ख) एवं 24 में भी संशोधन कर चुकी है, जिसके माध्यम से एनसीएल और सीआईएसएफ के अधिकृत अधिकारियों को अवैध खनन से जुड़े मामलों में व्यापक कानूनी अधिकार प्रदान किए गए थे। अब धारा 21(4) में संशोधन के बाद इन अधिकारियों की कार्रवाई और अधिक प्रभावी तथा कानूनी रूप से सशक्त हो गई है।
एनसीएल प्रबंधन का मानना है कि यह विधिक सुधार कंपनी के खनन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने, खनिज संपदा के संरक्षण, विधिसम्मत खनन व्यवस्था को मजबूत करने तथा सरकारी राजस्व की हानि रोकने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एनसीएल द्वारा विभिन्न परियोजनाओं में कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संशोधित प्रावधानों की जानकारी देने के साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
केंद्र सरकार के इस निर्णय से कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रशासनिक एजेंसियों का मानना है कि सख्त कानूनी अधिकार मिलने से अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगेगा, खनिज संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा पारदर्शी और वैधानिक खनन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।




































