IGNTU के पूर्व कुलपति प्रो. टी. वी. कट्टिमनी को महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार–2026

---Advertisement---

IGNTU के पूर्व कुलपति प्रो. टी. वी. कट्टिमनी को महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार–2026

अमरकंटक, मध्य प्रदेश : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. टी. वी. कट्टिमनी को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा प्रतिष्ठित श्री महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार–2026 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार बेंगलुरु स्थित विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में आयोजित श्री महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं पुरस्कार समारोह के अवसर पर प्रदान किया गया। समारोह में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर, मंत्री श्री के. एच. मुनियप्पा एवं श्री रघुमूर्ति, पूर्व मंत्री श्री एच. अंजनेय तथा वाल्मीकि गुरु पीठ के श्री प्रसन्नानंद पुरी स्वामीजी उपस्थित रहे। पुरस्कार समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रो. कट्टिमनी को सम्मानित किया गया। पुरस्कार के अंतर्गत ₹5 लाख की नकद राशि तथा 25 ग्राम का स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है

यह सम्मान मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है, विशेषकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक समुदाय के लिए, जहाँ प्रो. कट्टिमनी ने विश्वविद्यालय के संस्थागत विकास और जनजातीय उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रो. कट्टिमनी ने मध्य प्रदेश स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के दूसरे कुलपति तथा आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। उनके नेतृत्व एवं प्रशासनिक अनुभव ने जनजातीय समुदायों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों के विस्तार तथा शैक्षणिक संस्थानों के विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। IGNTU के साथ उनका जुड़ाव विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और जनजातीय समुदायों की शैक्षणिक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है

प्रो. कट्टिमनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से संबंधित कार्यों में भी सदस्य के रूप में जुड़े रहे हैं। शिक्षा सुधार, समावेशी शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी उनके व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। उनके शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योगदान को देशभर के शिक्षा जगत में पहचान मिली है।
प्रो. कट्टिमनी जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराओं, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और विकास संबंधी आकांक्षाओं की गहरी समझ रखते हैं। जनजातीय समाजों के साथ उनका जुड़ाव मध्य प्रदेश के लालपुर से लेकर आंध्र प्रदेश के लांबासिंगी क्षेत्र तक विस्तृत रहा है। उनका कार्य सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता तथा जनजातीय पहचान और विरासत के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है

महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार शिक्षा और जनजातीय समुदायों के उत्थान के प्रति उनके योगदान का महत्वपूर्ण सम्मान है। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के लिए गर्व का अवसर है। प्रो. कट्टिमनी की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक यात्रा समावेशी उच्च शिक्षा, जनजातीय सशक्तीकरण और सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्यरत शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा समाजकार्य के पेशेवरों के लिए प्रेरणास्रोत है

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment