हल षष्ठी की पूर्व संध्या पर हरछठमय हुआ अमरकंटक
संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना हेतु पूजन सामग्री खरीदने उमड़ीं माताएं
संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक / मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में हल षष्ठी (हरछठ) पर्व की पूर्व संध्या पर मंगलवार को बाजारों में आस्था और उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला । संतान की दीर्घायु , उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर पुत्रवती माताओं एवं महिलाओं ने हरछठ पूजन के लिए आवश्यक सामग्री की जमकर खरीदारी की । सुबह से शाम तक नगर परिषद शॉपिंग सेंटर , पुराने अस्पताल क्षेत्र तथा नर्मदा मंदिर परिसर के आसपास स्थित दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही
महिलाओं ने महुआ का दातून , महुआ के पत्तल , फ़सही का अन्न , मिट्टी के पात्र , पारंपरिक मिट्टी की चुकरिया , फल-फूल , बांस की टोकनी , जारी कांटी छूला पत्ता , भैंस का दूध , घी ,गोबर , और श्रृंगार सामग्री खरीदकर पूजन की तैयारियां पूरी कीं
बाजारों में बढ़ी रौनक से स्थानीय व्यापारियों में भी उत्साह दिखाई दिया ।
सनातन परंपरा में हल षष्ठी मातृत्व , कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक पर्व माना जाता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता हलधर भगवान बलराम से जुड़ा है । इस दिन माताएं व्रत रखकर अपनी संतानों के सुखी जीवन , स्वस्थ और दीर्घ आयु की कामना करती हैं ।
शांति कुटी के सामने लगी दुकानों में लल्लूराम उसराठे के पुत्र किशोर उसराठे द्वारा दातून , माहुआ के पत्तल तथा पूजन सामग्री से तैयार जारी छूली बेची जा रही थी , जिसे महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक खरीदा । वहीं प्रभुदयाल और लमनी बाई द्वारा पूजन में उपयोग होने वाले अनाजों की बिक्री की जा रही थी । पेंड्रा रोड से आई एक महिला पारंपरिक मिट्टी की चुकरिया बेचती नजर आई , जिनकी अच्छी मांग रही ।
नगर परिषद अध्यक्षा पार्वती सिंह उईके , वार्ड 15 की पार्षद विमला दुबे सहित कई महिलाओं ने बताया कि उन्होंने हरछठ पूजन की आवश्यक सामग्री खरीद ली है । अमरकंटक निवासी पिंकी यादव , किरण त्रिपाठी , प्रिया शर्मा , प्रीति उपाध्याय आदि ने बताया कि वे बुधवार को विधि-विधान से हरछठ माता एवं भगवान बलराम का पूजन कर संतानों के सुख , स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगी
हरछठ की पूर्व संध्या पर बाजारों में उमड़ी महिलाओं की भीड़ और पारंपरिक पूजन सामग्रियों की बढ़ी मांग यह दर्शाती है कि लोक आस्था और सनातन परंपराएं आज भी समाज में पूरी श्रद्धा के साथ जीवित हैं


































































