डिजिटल युग में हिंदी की नई उड़ान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 का भव्य शुभारंभ

---Advertisement---

डिजिटल युग में हिंदी की नई उड़ान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 का भव्य शुभारंभ

‘ए.आई., सोशल मीडिया और वैश्विक संभावनाओं’ पर रहेगा फोकस, प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने हिंदी की वैज्ञानिकता और डिजिटल विस्तार पर डाला प्रकाश

अमरकंटक, 1 सितंबर 2026। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में मंगलवार को राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी माह-2026 का भव्य शुभारंभ किया गया। इस वर्ष हिंदी माह की विषयवस्तु “डिजिटल युग में हिंदी: ए.आई., सोशल मीडिया और वैश्विक संभावनाएँ” निर्धारित की गई है। उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विज्ञान विभाग के प्राध्यापक प्रो. आलोक श्रोत्रिय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेन्द्र प्रताप ने किया। उन्होंने मंचासीन अतिथियों सहित विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया।

हिंदी को जन-गण और जन-जन की भाषा बताया

कार्यक्रम के प्रारंभ में मानविकी एवं भाषाशास्त्र संकाय की अधिष्ठाता प्रो. रेनू सिंह ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद हिंदी अधिकारी एवं हिंदी माह-2026 की समन्वयक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने सितंबर माह में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं, परिचर्चाओं एवं हिंदी संबंधी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान में राजभाषा हिंदी के उद्गम एवं विकास, अखिल भारतीय स्तर पर इसके अनुपालन तथा कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी को “जन-गण तथा जन-जन की भाषा” बताते हुए इसके सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया।

कंप्यूटर और ए.आई. के दौर में हिंदी की बढ़ती संभावनाएं

प्रो. श्रोत्रिय ने हिंदी की वैज्ञानिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी के लेखन और वाचन में काफी हद तक समानता होने के कारण कंप्यूटर कोडिंग और डिजिटल तकनीक में इसके प्रयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में हिंदी केवल पारंपरिक संचार का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि टेलीविजन, फिल्म, रेडियो, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक डिजिटल माध्यमों में भी इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इंटरनेट और आधुनिक तकनीकी संसाधनों के माध्यम से हिंदी की पहुंच देश की सीमाओं से बाहर तक तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में हिंदी के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।

डिजिटल संसाधनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कराया परिचित

मुख्य अतिथि ने राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध विभिन्न डिजिटल सुविधाओं एवं संसाधनों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी ई-कुंभ और ई-पुस्तकालय जैसे डिजिटल स्रोतों का उल्लेख करते हुए इनके उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि हिंदी को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि भाषा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जाए। ए.आई. और सोशल मीडिया के दौर में हिंदी के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, जिनका उपयोग भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए किया जा सकता है।

पूरे माह होंगी प्रतियोगिताएं और परिचर्चाएं

हिंदी माह-2026 के दौरान विश्वविद्यालय में विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं, परिचर्चाओं एवं अन्य भाषायी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोध अध्येताओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाना तथा कार्यालयीन एवं शैक्षणिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना है।

इसके साथ ही इस वर्ष की विषयवस्तु को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों को डिजिटल युग में हिंदी की बदलती भूमिका, ए.आई. के साथ हिंदी के संबंध, सोशल मीडिया में हिंदी के बढ़ते प्रभाव और हिंदी की वैश्विक संभावनाओं से भी परिचित कराया जाएगा।

हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प

समारोह के अंत में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीरेन्द्र प्रताप ने किया।

उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी तथा शोध अध्येता और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

हिंदी माह-2026 का यह आयोजन ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब हिंदी पारंपरिक साहित्य और संवाद की भाषा के साथ-साथ डिजिटल संचार, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक मंचों पर अपनी नई पहचान बना रही है। विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली आगामी गतिविधियों के माध्यम से हिंदी के इसी आधुनिक और वैश्विक स्वरूप को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के बीच आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

September 2, 2026

September 1, 2026

September 1, 2026

September 1, 2026

September 1, 2026

September 1, 2026

Leave a Comment