पद खत्म तो शासकीय मोनो भी खत्म! पूर्व जनप्रतिनिधियों के लेटरपैड पर रोक जरूरी

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पद खत्म तो शासकीय मोनो भी खत्म! पूर्व जनप्रतिनिधियों के लेटरपैड पर रोक जरूरी

अनूपपुर। निर्वाचित पद की अवधि समाप्त होने के बाद भी शासकीय मोनो और आधिकारिक प्रतीक वाले लेटरपैड का निजी उपयोग किया जाता है तो यह प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय होना चाहिए। मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि शासकीय पहचान और सरकारी प्रतीकों के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक से जुड़ा है

पूर्व निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए पद समाप्त होने के बाद शासकीय संस्था का मोनो लगाकर निजी लेटरपैड तैयार कराने और उसका उपयोग करने पर स्पष्ट रोक की जरूरत है। बिना सक्षम प्राधिकारी की विधिवत अनुमति के किसी भी व्यक्ति को शासकीय मोनो वाला लेटरपैड तैयार कराने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
शासकीय मोनो किसी व्यक्ति के पुराने पद की निजी पहचान नहीं है। यदि किसी लेटरपैड पर शासकीय मोनो लगाकर कलेक्टर, एसपी या अन्य अधिकारियों को पत्र भेजे जाते हैं, तो प्रशासन को यह जांचना चाहिए कि उस मोनो के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी और लेटरपैड किस अधिकार से तैयार कराया गया

यदि कोई ऐसा लेटरपैड प्रशासन के संज्ञान में आता है तो कलेक्टर को किसी शिकायत का इंतजार किए बिना स्वतः संज्ञान लेकर उसकी वैधता की जांच करानी चाहिए। संबंधित उपयोगकर्ता से अनुमति का प्रमाण मांगा जाए और संबंधित शासकीय संस्था से यह स्पष्ट कराया जाए कि मोनो के उपयोग की कोई आधिकारिक अनुमति जारी हुई थी या नहीं

यदि जांच में लेटरपैड अनधिकृत अथवा कूटरचित पाया जाता है, तो कार्रवाई केवल लेटरपैड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उससे जारी हर पत्र का रिकॉर्ड खंगाला जाना चाहिए—किस अधिकारी को भेजा गया, किस पदनाम से भेजा गया और उसके आधार पर कोई शासकीय कार्रवाई हुई या नहीं

सरकारी प्रतीकों के अनुचित उपयोग को नियंत्रित करने के लिए State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 तथा संबंधित नियम मौजूद हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना वैध अनुमति शासकीय मोनो के इस्तेमाल की स्थिति में कानून के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए

हालांकि किसी दस्तावेज को जांच से पहले ही ‘कूटरचित’ घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि सक्षम जांच में यह प्रमाणित हो जाता है कि शासकीय मोनो वाला लेटरपैड बिना अनुमति तैयार कराया गया और उसका इस्तेमाल आधिकारिक स्वरूप में किया गया, तो जिम्मेदारी तय कर सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है

सवाल अब यही है—पद समाप्त होने के बाद भी शासकीय मोनो वाले निजी लेटरपैड क्यों चल रहे हैं? प्रशासन कब स्पष्ट करेगा कि बिना अनुमति सरकारी मोनो का इस्तेमाल प्रतिबंधित है? और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कब होगी?

पद समाप्त होते ही सरकारी पहचान का अधिकार भी समाप्त होना चाहिए—शासकीय मोनो किसी की निजी राजनीतिक ठसक का प्रतीक नहीं बन सकता

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