अमरकंटक में चौथे सोमवार के बाद मंदिर – घाट हुए शांत ,

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अमरकंटक में चौथे सोमवार के बाद मंदिर – घाट हुए शांत ,

एक माह तक शिवमय बनी रही पवित्र नगरी

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / आस्था की पावन नगरी अमरकंटक में श्रावण मास के चौथे सोमवार के समापन के साथ ही एक माह से उमड़ा श्रद्धा और शिवभक्ति का सैलाब धीरे-धीरे थम स गया । श्रावण के सोमवारो तक जहां नर्मदा उद्गम मंदिर , कोटितीर्थ घाट , रामघाट , ज्वालेश्वर धाम तथा नगर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी , वहीं अब घाटों और मंदिर परिसरों में सामान्य दिनों जैसा शांत वातावरण देखने को मिला रहा

श्रावण मास के प्रारंभ से ही देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त , कांवड़िये और श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचते रहे । मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर स्नान , दर्शन एवं पूजन-अर्चन के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया गया । पूरे माह अमरकंटक की फिजाएं “हर-हर महादेव” और “जय मां नर्मदा” के जयघोष से गूंजती रहीं । विशेष रूप से अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा , जिससे पूरा नगर शिवमय हो उठा था ।

पुलिस प्रशासन रहा सतर्क , सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और जनप्रतिनिधियों के आगमन को देखते हुए पुलिस एवं जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा । राजेंद्रग्राम एसडीओपी नवीन तिवारी तथा अमरकंटक थाना प्रभारी मानिम टोप्पो के नेतृत्व में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई । प्रमुख धार्मिक स्थलों , घाटों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिस बल तैनात रही तथा लगातार निगरानी भी रखी गई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार श्रावण मास के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचते रहे , जिसके मद्देनजर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया । जिला प्रशासन की सतर्कता और सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते पूरे माह श्रद्धालुओं ने सुरक्षित वातावरण में दर्शन-पूजन किया तथा किसी भी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली

धार्मिक गतिविधियों से बढ़ी रौनक , व्यापार को मिला लाभ

श्रावण मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिक आयोजनों , कांवड़ यात्राओं , भजन-कीर्तन और विशेष पूजन कार्यक्रमों ने आध्यात्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रखा । बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं से स्थानीय व्यापार , होटल व्यवसाय , परिवहन और पर्यटन गतिविधियों को भी उल्लेखनीय लाभ मिला । नगर के बाजारों में पूरे माह चहल-पहल बनी रही

अब श्रावण मास के समापन के बाद अमरकंटक पुनः अपनी सामान्य गति में लौट रहा है , लेकिन एक माह तक चली शिवभक्ति , श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह की स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहेंगी  रक्षाबंधन , कजलियां और अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर नगर में नई तैयारियां भी शुरू हो गई हैं । श्रावण की भीड़ भले ही लौट गई हो , किंतु भगवान शिव और मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा की अमिट छाप आज भी अमरकंटक की फिजाओं में महसूस की जा सकती है

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