अवैध कोयला खनन रोकने ईसीएल की नई पहल, सभी कर्मियों और हितधारकों से ‘खनन प्रहरी’ ऐप डाउनलोड करने की अपील

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अवैध कोयला खनन रोकने ईसीएल की नई पहल, सभी कर्मियों और हितधारकों से ‘खनन प्रहरी’ ऐप डाउनलोड करने की अपील

सीएमडी सतीश झा बोले— जनसहभागिता और तकनीक से ही सुरक्षित रहेंगे देश के बहुमूल्य कोयला संसाधन

सांकतोड़िया। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने अवैध कोयला खनन एवं कोयला चोरी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी कर्मियों और हितधारकों से ‘खनन प्रहरी’ मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड कर इसके जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का आह्वान किया है। ईसीएल ने इसे राष्ट्र के बहुमूल्य कोयला संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शी एवं उत्तरदायित्वपूर्ण खनन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी केवल राष्ट्रीय संपदा को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि इससे श्रमिकों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हित भी गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रत्येक कर्मचारी और हितधारक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा विकसित ‘खनन प्रहरी’ मोबाइल एप्लिकेशन इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह ऐप आम नागरिकों, कर्मचारियों और संबंधित हितधारकों को अवैध कोयला खनन एवं चोरी से जुड़ी गतिविधियों की सूचना सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का सरल, सुरक्षित और डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

सीएमडी सतीश झा ने सभी कर्मियों से अपील की कि वे स्वयं इस एप्लिकेशन को डाउनलोड करें और अपने सहयोगियों तथा स्थानीय लोगों के बीच भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं। उन्होंने कहा कि जब तक समाज, कर्मचारी और प्रशासन मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं होगा।

ईसीएल ने अपने सभी कर्मचारियों एवं हितधारकों से राष्ट्रहित में इस अभियान से जुड़ने और ‘खनन प्रहरी’ ऐप का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता के समन्वय से अवैध कोयला खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, जिससे देश के बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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