भू-जल संरक्षण पर एसईसीएल की बड़ी पहल, दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला सम्पन्न
विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन, भू-जल पुनर्भरण और नियामकीय प्रावधानों पर दिए महत्वपूर्ण सुझाव, प्रतिभागियों को बांटे प्रमाण-पत्र

बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर में “ग्राउंड वाटर रेगुलेशन एंड कंट्रोल” विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए), नई दिल्ली एवं केंद्रीय भू-जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी), उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भू-जल संरक्षण, जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा नियामकीय प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देना था।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक (पर्यावरण) सी. जयदेव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और जल का वैज्ञानिक प्रबंधन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को व्यवहारिक ज्ञान और नई तकनीकों से परिचित कराने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।
दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों से आए अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण (रिचार्ज), उद्योगों में जल के प्रभावी उपयोग, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा भू-जल से जुड़े कानूनी एवं नियामकीय प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण में केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण, नई दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रबीर के. नाइक, वैज्ञानिक-सी उद्देश्य कुमार एवं एच. वी. सोफिया के तथा केंद्रीय भू-जल बोर्ड, रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भूषण आर. लामसोगे, वैज्ञानिक-सी सिद्धांत कुमार साहू, सायली उमेश तेंबूर्णे और प्रमोद साहू ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विभिन्न तकनीकी विषयों पर व्याख्यान दिए। उन्होंने उद्योगों में जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों, भू-जल दोहन के नियमन तथा सतत विकास की दिशा में अपनाए जाने वाले उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने भू-जल प्रबंधन, जल संरक्षण, आवश्यक अनुमतियों और व्यावहारिक चुनौतियों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। समापन सत्र में विशेषज्ञों ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यपालक निदेशक (पर्यावरण) सी. जयदेव ने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इससे प्राप्त जानकारी भविष्य में जल संरक्षण, भू-जल प्रबंधन तथा पर्यावरणीय दायित्वों के प्रभावी निर्वहन में सहायक सिद्ध होगी।
एसईसीएल प्रबंधन के अनुसार यह दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, भू-जल के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और सतत खनन गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है।



































