मांगें पूरी नहीं होने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का ‘काला दिवस’ आज, सरकार से 19 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय की मांग

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अरुण द्विवेदी की रिपोर्ट

शहडोल | 10 जुलाई 2026

 

संगठन की ब्यौहारी ब्लांक अध्यक्ष शैली मिश्रा ने बताया कि मध्यप्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन ने 10 जुलाई को अपनी लंबित मांगों को लेकर ‘काला दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। यूनियन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की है।

 

यूनियन का कहना है कि सरकार द्वारा पूर्व में किए गए कई आश्वासनों के बावजूद अब तक मांगों पर अमल नहीं हुआ है। संगठन का आरोप है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अभी भी बेहद कम मानदेय मिल रहा है तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सुविधाएं और अधिकार नहीं दिए गए हैं।

 

ज्ञापन में प्रमुख मांगों के रूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को ग्रेड-3 और ग्रेड-4 सरकारी कर्मचारी का दर्जा, 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम वेतन, पेंशन व्यवस्था, 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ECCE (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, शिक्षा एवं विकास) को कानूनी गारंटी, नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने, चारों श्रम संहिताएं (Labour Codes) निरस्त करने तथा FRS और अनिवार्य e-KYC जैसी शर्तों को समाप्त करने की मांग शामिल है।

 

इसके अलावा संगठन ने आंगनवाड़ी केंद्रों में बेहतर भोजन, सुरक्षित भवन, बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं, कार्यकर्ताओं को डिजिटल कार्यों के लिए टैबलेट, इंटरनेट व अन्य खर्चों का भुगतान, चिकित्सा अवकाश, TA/DA, समय पर पदोन्नति, अतिरिक्त विभागीय कार्यों से मुक्ति और शिकायत निवारण समितियों के गठन जैसी 19 प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं।

 

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के हित में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

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