धनपुरी नगर परिषद की अध्यक्ष के जाति प्रमाण-पत्र पर हाईकोर्ट सख्त, 90 दिन में जांच पूरी करने का निर्देश
जाति प्रमाण-पत्र और जन्मतिथि विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल, शिकायतों पर कलेक्टर करेंगे समयबद्ध निर्णय
शहडोल। धनपुरी नगर परिषद की अध्यक्ष रविंदर कौर छाबड़ा के जाति प्रमाण-पत्र को लेकर दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति मनींदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने शहडोल कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि अध्यक्ष के जाति प्रमाण-पत्र से संबंधित शिकायत का विधि अनुसार परीक्षण कर 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। न्यायालय ने इस निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया है।
यह याचिका धनपुरी नगर परिषद के पार्षद आनंद कछेर, भोला प्रसाद पनिका और स्कंद कुमार सानी की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नगर परिषद अध्यक्ष रविंदर कौर छाबड़ा ने अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के प्रमाण-पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा, जबकि उनके जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर गंभीर सवाल हैं। याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि इस मामले की जांच कर प्रमाण-पत्र की वैधानिकता का परीक्षण कराया जाए।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि शिकायत का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण करने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है। इसलिए शहडोल कलेक्टर को निर्देशित किया गया है कि दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर निष्पक्ष निर्णय लें।
इधर, इस मामले के साथ ही धनपुरी की राजनीति में एक और विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार प्लेटफॉर्म पर भाजपा नेता जानू छाबड़ा की जन्मतिथि को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पोस्टों में दावा किया गया है कि समग्र आईडी में दर्ज जन्मतिथि में बदलाव कर उम्र कम दर्शाई गई है। अलग-अलग अभिलेखों में वर्ष 1988, 1991 और अन्य प्रविष्टियों का उल्लेख होने का दावा किया गया है। इन दावों के आधार पर भाजपा संगठन की आयु सीमा संबंधी नियमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, जन्मतिथि संबंधी इन आरोपों की किसी सक्षम सरकारी एजेंसी या न्यायालय द्वारा अभी पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को केवल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की निगाहें शहडोल कलेक्टर की जांच प्रक्रिया पर टिक गई हैं। आगामी 90 दिनों में जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि जाति प्रमाण-पत्र संबंधी शिकायत में क्या तथ्य सामने आते हैं और सक्षम प्राधिकारी क्या निर्णय देता है। इस आदेश के बाद धनपुरी नगर परिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आगामी दिनों में इस मामले पर सभी की नजर बनी रहेगी।




































