राजनगर रोड सेल यार्ड में प्रदूषण नियंत्रण पर उठे सवाल, धूल से परेशान लोगों ने लगाए पर्यावरण मानकों की अनदेखी के आरोप
अनूपपुर। एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के राजनगर रोड सेल स्टॉक यार्ड में पर्यावरण मानकों के पालन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि यार्ड से उड़ने वाली कोयले की धूल के कारण आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि ग्रीन माइनिंग और प्रदूषण नियंत्रण के दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यार्ड की सीमा पर प्रभावी विंड ब्रेकर दीवारें और पर्याप्त थ्री-टियर ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की गई है। उनका कहना है कि तेज हवा और कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उठने वाली धूल सीधे रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच रही है। कई घरों की छतों, आंगनों तथा आसपास के क्षेत्र में कोयले की धूल जमा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
लोगों का यह भी कहना है कि कोल इंडिया की पर्यावरण संबंधी गाइडलाइन के अनुसार कोयले के ढेरों पर नियमित पानी का छिड़काव, फॉग कैनन, पक्के आंतरिक मार्ग तथा धूल नियंत्रण के अन्य उपाय प्रभावी ढंग से लागू होने चाहिए। आरोप है कि कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं का अपेक्षित स्तर पर पालन नहीं हो रहा, जिससे धूल का गुबार लगातार फैल रहा है।
परिवहन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोयला परिवहन वाहनों में तिरपाल ठीक से नहीं लगाया जाता और व्हील वॉश जैसी व्यवस्था भी प्रभावी नहीं दिखती। इसके कारण मुख्य मार्गों पर कोयले की धूल फैल रही है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और स्थानीय दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिकों ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आवश्यक व्यवस्थाओं में कमी पाई जाती है तो उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को प्रदूषण से राहत मिल सके
इनका कहना है
पूरे क्षेत्र में नियमित पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। पर्यावरण की गाइडलाइन के अनुसार सभी आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। यदि राजनगर रोड सेल स्टॉक यार्ड में कहीं भी पर्यावरण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है तो आप हमें बताइए। हम संबंधित ठेकेदार को और सख्ती से निर्देश देंगे तथा व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे
जिंदल रजक, पर्यावरण अधिकारी, राजनगर हसदेव क्षेत्र
राजनगर यार्ड में पर्यावरण नियमों का ‘जनाजा’: फाइलों में सिमटी ‘ग्रीन माइनिंग’, धूल के गुबार में घुट रहा अनूपपुर का दम

राजनगर यार्ड में पर्यावरण नियमों का ‘जनाजा’: फाइलों में सिमटी ‘ग्रीन माइनिंग’, धूल के गुबार में घुट रहा अनूपपुर का दम
विशेष संवाददाता, अनूपपुरराजनगर (हसदेव क्षेत्र): मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के राजनगर रोड सेल स्टॉक यार्ड से लापरवाही और पर्यावरण विनाश की एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन-प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल कर रख दी है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की जिस ‘कॉर्पोरेट पर्यावरण नीति’ को खदानों और यार्डों के आसपास रहने वाले इंसानों और प्रकृति की सुरक्षा के लिए ढाल माना जाता है, राजनगर यार्ड में उस नीति का सरेआम कत्ल किया जा रहा है। ‘ग्रीन माइनिंग’ और ‘प्रदूषण मुक्त परिवहन’ जैसे भारी-भरकम शब्द यहां केवल कागजी फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि नियमों को ताक पर रखकर स्थानीय जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नागरिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और खुद ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि प्रबंधन की इस घोर लापरवाही के कारण आज पूरा क्षेत्र एक डस्ट बिन में तब्दील हो चुका है
गायब हैं विंड ब्रेकर दीवारें और थ्री-टियर ग्रीन बेल्ट, सीधे बस्तियों में घुस रहा कोयले का जहर
वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के स्पष्ट नियम कहते हैं कि किसी भी कोयला स्टॉक यार्ड के चारों तरफ हवा के रुख को रोकने के लिए 20 से 30 फीट ऊंची विंड ब्रेकर सुरक्षा दीवारें बनाना अनिवार्य है। इसके साथ ही खदान और यार्ड की बाहरी सीमा पर पेड़ों की तीन घनी परतें यानी ‘थ्री-टियर ग्रीन बेल्ट’ विकसित की जानी चाहिए, ताकि पेड़ एक प्राकृतिक फिल्टर का काम करें और उड़ती हुई डस्ट रिहायशी इलाकों तक न पहुंच पाए
लेकिन राजनगर यार्ड में जब जमीनी हकीकत देखी जाती है, तो दूर-दूर तक न तो कोई विंड ब्रेकर दीवार नजर आती है और न ही पेड़ों की वह सुरक्षात्मक तीन परतें दिखाई देती हैं। पेड़ों के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है। नतीजा यह है कि जब तेज हवा चलती है या भारी मशीनों से कोयले की लोडिंग होती है, तो कोयले की यह बारीक और घातक डस्ट बिना किसी रुकावट के सीधे आसपास की बस्तियों और घरों के भीतर प्रवेश कर रही है। लोगों के घरों की छतों, आंगनों और यहां तक कि पीने के पानी के बर्तनों पर भी काली परत जमने लगी है
कागजी पर्यावरण नीति बनाम राजनगर यार्ड का दमघोंटू माहौल
कोल इंडिया की गाइडलाइंस में स्पष्ट निर्देश हैं कि यार्ड के भीतर कोयले के विशाल ढेरों पर चौबीसों घंटे स्वचालित स्प्रिंकलर (पानी छिड़कने वाले यंत्र) और आधुनिक फॉग कैनन यानी एंटी-स्मॉग गन सक्रिय रहनी चाहिए, ताकि कोयला डस्ट हवा में मिल ही न सके। मगर राजनगर रोड सेल यार्ड में धूल को दबाने का कोई पुख्ता और स्थायी इंतजाम जमीन पर दिखाई नहीं देता। कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान उठने वाला काला गुबार पूरे इलाके की आबोहवा को इस कदर जहरीला बना देता है कि वहां खड़े होना भी दूभर हो जाता है
नियमों के मुताबिक यार्ड के भीतर की अंदरूनी सड़कें और संपर्क मार्ग कंक्रीट या डामर के पक्के होने चाहिए, जिनकी मशीनों से नियमित सफाई की जानी चाहिए। इसके विपरीत, यार्ड के रास्ते पूरी तरह से कोयले की मोटी धूल से पटे पड़े हैं। जब भारी-भरकम ट्रक इन रास्तों से गुजरते हैं, तो टनों कोयला धूल उड़कर वायुमंडल में तैरने लगती है, जिससे पूरा राजनगर क्षेत्र धुंध की चपेट में आ जाता है।
परिवहन के नियमों की खुली अनदेखी: बिना व्हील वॉश और बिना तिरपाल दौड़ रहे ट्रक
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी ‘सहमति आदेश’ (Consent to Operate) की शर्तों का उल्लंघन तो यहां कदम-कदम पर देखा जा सकता है। नियम कहता है कि यार्ड से बाहर मुख्य मार्ग पर निकलने से पहले हर एक ट्रक का ‘व्हील वॉश’ (पहिए धोना) होना अनिवार्य है, ताकि टायरों में चिपकी कोयले की कीचड़ और डस्ट सड़कों पर न फैले। इसके साथ ही ट्रकों में लोड कोयला 100% मोटे तिरपाल से कसकर ढका होना चाहिए
लेकिन राजनगर यार्ड के निकास द्वार पर न तो व्हील वाशिंग की कोई सक्रिय व्यवस्था दिखती है और न ही ट्रकों को ढंग से ढकने की जहमत उठाई जा रही है। बिना पहिए धोए और आधे-अधूरे या बिना तिरपाल के ही कोयला लदे ये भारी ट्रक दिन-रात मुख्य मार्गों पर सरपट दौड़ रहे हैं। इन ट्रकों से लगातार गिरती कोयले की डस्ट और उड़ता गुबार राहगीरों, स्कूली बच्चों और सड़क किनारे बसी दुकानों व मकानों के लिए जी का जंजाल बन चुका है।
प्रदूषण बोर्ड की रहस्यमयी चुप्पी और जनता का फूटा गुस्सा: इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के क्षेत्रीय कार्यालय और स्थानीय प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी है
कानून की किताबों में जिन नियमों का उल्लंघन होने पर भारी जुर्माने और खदान बंदी तक का प्रावधान है, उन नियमों की राजनगर में सरेआम धज्जियां उड़ते देखकर भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय जनता का आक्रोश अब चरम पर है। लोगों का साफ कहना है कि यदि एसईसीएल प्रबंधन ने तत्काल फॉग कैनन, विंड ब्रेकर दीवारों और थ्री-टियर ग्रीन बेल्ट जैसी अनिवार्य व्यवस्थाओं को जमीन पर लागू नहीं किया, तो वे अपने स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।




































