एमएमडीआर अधिनियम के संशोधित प्रावधानों पर एनसीएल में दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
अवैध खनन और कोयला चोरी पर प्रभावी कार्रवाई के लिए अधिकारियों को दिए जा रहे कानूनी अधिकारों एवं प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण

सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के केंद्रीय तकनीकी एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीईटीआई) में मंगलवार से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) के संशोधित प्रावधानों पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 30 जून एवं 1 जुलाई तक आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एनसीएल के अधिकारियों को हाल ही में संशोधित कानूनी प्रावधानों से अवगत कराना तथा अवैध खनन एवं कोयला चोरी के मामलों में प्रभावी और विधिसम्मत कार्रवाई के लिए उन्हें सक्षम बनाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीसीसीएल के वरिष्ठ सलाहकार (सुरक्षा) एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी विपुल शुक्ला अधिकारियों को एमएमडीआर अधिनियम की धारा 22, 23(ख) एवं 24 में किए गए संशोधनों की विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अधिकृत अधिकारियों की शक्तियों एवं दायित्वों, साक्ष्य संकलन, तलाशी एवं जांच की प्रक्रिया, न्यायालय में परिवाद दायर करने की विधिक प्रक्रिया तथा कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि संशोधित कानूनों की सही समझ अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रशिक्षण के प्रथम दिन एनसीएल की अमलोरी, बीना, ब्लॉक-बी, सीडब्ल्यूएस, दुधिचुआ एवं जयंत परियोजनाओं के क्षेत्रीय महाप्रबंधक, परियोजना अधिकारी, खान प्रबंधक, एरिया मैनेजर (मानव संसाधन), सुरक्षा से जुड़े नोडल अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में अधिकारियों को वास्तविक मामलों के उदाहरणों के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर अधिनियम की धारा 22, 23(ख) एवं 24 में संशोधन किए जाने के बाद एनसीएल के अधिकृत अधिकारियों तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अधिकारियों को अवैध खनन एवं उससे जुड़े मामलों में व्यापक वैधानिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। अब अधिकृत अधिकारी साक्ष्य संकलित कर सक्षम न्यायालय में सीधे परिवाद प्रस्तुत करने सहित अधिनियम के तहत प्रदत्त अन्य शक्तियों का प्रभावी उपयोग कर सकेंगे। एनसीएल प्रबंधन का मानना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों की कानूनी दक्षता बढ़ाने के साथ खनन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और राष्ट्रीय खनिज संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।




































