ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी
धार जिले के जनजातीय कार्य विभाग में शिक्षकों के हालिया स्थानांतरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शासन की स्थानांतरण नीति और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता दी जानी थी और रिक्त पदों पर पदस्थापना की जानी थी, जबकि प्रशासनिक स्थानांतरण सामान्यतः विशेष परिस्थितियों या शिकायत के आधार पर एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में किए जाते हैं।
विवाद का केंद्र जिला मुख्यालय स्थित उर्दू स्कूल बना हुआ है, जहां एक ही शाला परिसर में दो महिला शिक्षिकाओं का प्रशासनिक स्थानांतरण किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षिका नाजिया खान का कहना है कि उन्होंने स्थानांतरण का आवेदन नहीं दिया था, उनके विरुद्ध कोई शिकायत भी नहीं है और वे जनगणना कार्य की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। इसके बावजूद उनका उसी परिसर में स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सेवा निवृत्ति में लगभग तीन वर्ष शेष हैं।
जानकारी के अनुसार, नाजिया खान का स्थानांतरण महजबी खान के स्थान पर किया गया, जबकि महजबी खान ने भी स्थानांतरण की मांग नहीं की थी और उनके खिलाफ भी किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है। ऐसे में एक ही परिसर में दोनों शिक्षिकाओं के स्थानांतरण को लेकर विभागीय प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।
इस संबंध में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन व्यस्तता के कारण उनका बयान प्राप्त नहीं हो सका।
धार से साबिर खान की रिपोर्ट




































