मोबाइल की दुनिया से दूर योग को बनाया जीवन का आधार, स्नेहा सोनी बनीं क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा

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मोबाइल की दुनिया से दूर योग को बनाया जीवन का आधार, स्नेहा सोनी बनीं क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा

नियमित साधना और दृढ़ संकल्प ने दिलाई राष्ट्रीय स्तर तक पहचान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर बढ़ा उत्साह

अनूपपुर। आज के आधुनिक दौर में जहाँ अधिकांश युवा अपना समय मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यतीत कर रहे हैं, वहीं जिले की कोतमा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रेऊदां की होनहार बेटी स्नेहा सोनी ने योग को अपनी दिनचर्या और जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाकर एक अलग मुकाम हासिल किया है। कम उम्र में ही योग के प्रति उनकी समर्पित साधना, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई है।

स्नेहा सोनी, सुनील सोनी एवं पप्पी सोनी की पुत्री हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो ग्रामीण क्षेत्र की बेटियाँ भी राष्ट्रीय मंच तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकती हैं। स्नेहा कई वर्षों से नियमित रूप से योगाभ्यास कर रही हैं और कठिन से कठिन योग आसनों में दक्षता प्राप्त कर चुकी हैं।

स्नेहा के अनुसार योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने की एक अद्भुत विधा है। योग ने उनके शरीर को लचीला बनाया, मानसिक एकाग्रता बढ़ाई और आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयाँ दी हैं। योग के कारण उन्हें शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली है।

उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि वर्ष 2026 में उन्होंने खेलो एमपी के माध्यम से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की योग प्रतियोगिता में भाग लेकर अनूपपुर जिले और मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया। यह उपलब्धि उनके परिवार, गुरुजनों और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।

योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते स्नेहा को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करने का अवसर भी मिला। मुख्यमंत्री से प्राप्त प्रोत्साहन और आशीर्वाद ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया तथा भविष्य में योग के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करने का संकल्प दिया।

स्नेहा का उद्देश्य केवल स्वयं सफलता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि योग की महत्ता को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना भी है। वे अपने आसपास के बच्चों और युवाओं को नियमित योग करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी उपलब्धियों से प्रेरित होकर क्षेत्र के कई बच्चे और युवा योगाभ्यास की ओर आकर्षित हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्नेहा सोनी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि योग को यदि जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बन सकता है।

उन्होंने कहा, “योग मेरे लिए केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि मेरी पहचान, मेरा आत्मविश्वास और मेरे जीवन की शक्ति है।”

आज स्नेहा सोनी की सफलता ग्रामीण क्षेत्र की उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

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