कृति महिला मंडल की ‘एक कदम’ मुहिम से स्थानीय युवतियों को मिली नई पहचान, स्वरोजगार के जरिए बनेंगी आत्मनिर्भर

सिंगरौली। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एनसीएल की झिंगुरदा परियोजना की सुगंधा महिला समिति ने एक सराहनीय पहल की है। कृति महिला मंडल की मुहिम ‘एक कदम’ के अंतर्गत क्षेत्र की युवतियों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल से जुड़ी युवतियां अब अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगी।
इसी क्रम में क्षेत्र के रानी दुर्गावती स्वयं सहायता समूह को व्यवसाय संचालन के लिए नगर निगम के सहयोग से झिंगुरदा कोऑपरेटिव परिसर में एक दुकान उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही व्यापार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है। दुकान के शुभारंभ अवसर पर सीलोव्स एवं कृति महिला मंडल की अध्यक्षा बी. के. दुर्गा, उपाध्यक्षा नम्रता कुमार, शीला द्विवेदी, रूबी जायसवाल सहित महिला मंडल की सदस्याएं और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
सुगंधा महिला समिति के इस प्रयास से स्वयं सहायता समूह की युवतियों को जूट उत्पाद, सिलाई कार्य और ब्यूटी पार्लर जैसी गतिविधियों के लिए एक स्थायी मंच प्राप्त हुआ है। इससे उनकी उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और बाजार तक पहुंच में वृद्धि होगी। समिति द्वारा युवतियों को कौशल विकास प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे बाजार की मांग के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकेंगी।
महिला समिति इन उत्पादों की मार्केटिंग और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सहयोग करेगी, जिससे समूह से जुड़ी महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी।
आधुनिक दौर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समूह को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है। इसके तहत बैंक क्रेडिट लिंकेज कराया जाएगा तथा समूह के उत्पादों को प्रमुख ई-मार्केट प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में रानी दुर्गावती स्वयं सहायता समूह से लगभग 10 से 12 युवतियां जुड़ी हुई हैं, जिन्हें इस पहल के माध्यम से प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है। समूह द्वारा तैयार किए जाने वाले आकर्षक और उच्च गुणवत्ता वाले जूट उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कृति महिला मंडल और सुगंधा महिला समिति की यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय कौशल को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।




































