न्यायमूर्ति की टिप्पणी पर भड़की भाकपा, कहा- बेरोजगार युवाओं और पत्रकारों का अपमान
अनूपपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद अनूपपुर ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं, एक्टिविस्टों एवं पत्रकारों को लेकर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। पार्टी के राज्य परिषद सदस्य एवं आदिवासी नेता कामरेड समर शाह सिंह ने जारी बयान में कहा कि देश में उच्च शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सरकार विफल रही है, वहीं जो युवा सामाजिक संगठनों से जुड़कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनका उपहास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगार युवाओं को कभी पकौड़े तलने, पान दुकान चलाने या अन्य छोटे कार्यों की सलाह दी जाती है, जबकि रोजगार के स्थायी अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे समय में न्यायपालिका की ओर से इस प्रकार की टिप्पणी युवाओं की पीड़ा को और बढ़ाने वाली है।
समर शाह सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई थी। यदि जनहित में संघर्ष करना गलत है, तो इतिहास के अनेक महान नेता भी उसी श्रेणी में आ जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को “आंदोलनजीवी” और “परजीवी” कहकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद अनूपपुर ने उक्त टिप्पणी को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसकी तीव्र भर्त्सना की है।



































