केवई नदी बचाने सड़क पर उतरे युवा

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केवई नदी बचाने सड़क पर उतरे युवा

अवैध उत्खनन और प्रस्तावित बैराज निर्माण के विरोध में 13 मई को चंगेरी में होगा जल सत्याग्रह

कोतमा। कोतमा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी को बचाने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। नदी में लगातार हो रहे अंधाधुंध अवैध उत्खनन एवं प्रस्तावित बैराज निर्माण के विरोध में क्षेत्र के युवाओं, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने निर्णायक संघर्ष का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में 13 मई बुधवार को चंगेरी में जल सत्याग्रह आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां तेज हो गई हैं।

क्षेत्र में केवई नदी को लेकर व्यापक जनआक्रोश देखा जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि केवई नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और जीवन का आधार है। इसके बावजूद नदी के अस्तित्व के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन और संबंधित कंपनी की मिलीभगत से अवैध उत्खनन को संरक्षण दिया जा रहा है तथा बिना पर्याप्त पारदर्शिता और जनसहमति के बैराज निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह नदी का दोहन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में पूरे कोतमा विधानसभा क्षेत्र को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे किसानों, मछुआरों और नदी पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। ग्रामीणों का मानना है कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ेगा और भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ेगा।

13 मई को प्रस्तावित जल सत्याग्रह के माध्यम से आंदोलनकारी अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने, कथित अवैध बैराज निर्माण को निरस्त करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करेंगे। आंदोलन से जुड़े युवाओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल सत्याग्रह के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

वहीं क्षेत्र में इस आंदोलन को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक संगठन एवं ग्रामीण जल सत्याग्रह में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह केवल एक नदी को बचाने का आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और क्षेत्र के अस्तित्व की लड़ाई है।

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