650 कर्मचारियों से काम, रिकॉर्ड में महज 189 नाम! जय अंबे कंपनी में वेतन भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
नौ महीने से एचपीसी दर के अनुसार वेतन नहीं मिलने का आरोप, ड्राइवर-हेल्पर और सुपरवाइजरों के आंदोलन से कई घंटे ठप रहा कामकाज; एसईसीएल प्रबंधन की निगरानी पर भी सवाल
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट। काम सैकड़ों कर्मचारी करें, लेकिन एसईसीएल से संबंधित रिकॉर्ड में उनमें से महज 189 के नाम दर्ज होने का दावा सामने आए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि बाकी कर्मचारियों का हिसाब कहां है? रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड के ड्राइवर, हेल्पर और सुपरवाइजरों के आंदोलन ने वेतन भुगतान के साथ-साथ कर्मचारी रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। कर्मचारियों ने एचपीसी (हाई पावर कमेटी) दर के अनुसार वेतन देने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पिछले करीब नौ महीने से उन्हें निर्धारित दर के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के चलते कई घंटे तक कामकाज प्रभावित रहा। अब सवाल यह है कि कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान कौन करेगा और रिकॉर्ड में कथित अंतर की जिम्मेदारी किसकी है?
नौ महीने से वेतन को लेकर नाराजगी, भुगतान में भारी अंतर का आरोप
आंदोलनरत कर्मचारियों के मुताबिक, कंपनी में काम करने वाले अलग-अलग कर्मचारियों को 10 हजार, 15 हजार, 18 हजार और 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके काम की प्रकृति, जिम्मेदारी और लागू वेतन दर के अनुरूप भुगतान नहीं हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
कर्मचारियों का कहना है कि वे खदान परियोजना में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन वेतन की गणना और वास्तविक भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि संबंधित श्रेणी के कर्मचारियों पर एचपीसी की निर्धारित दरें लागू होती हैं, तो कंपनी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है। वहीं, प्रबंधन को वेतन पर्ची, उपस्थिति विवरण और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड के जरिए स्थिति सामने रखनी चाहिए।
650 कर्मचारी कार्यरत होने का दावा, रिकॉर्ड में 189 नाम
मामले का सबसे गंभीर पहलू कर्मचारियों की संख्या को लेकर सामने आया है। आंदोलनरत कर्मचारियों का दावा है कि जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड में करीब 650 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि एसईसीएल से संबंधित रिकॉर्ड में केवल 189 कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं।
यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह जांच का विषय है कि वास्तविक रूप से काम कर रहे सभी कर्मचारियों का विवरण संबंधित अभिलेखों में दर्ज है या नहीं। शेष कर्मचारियों की नियुक्ति, उपस्थिति, वेतन भुगतान और कार्यस्थल पर तैनाती से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जरूरी है। हालांकि, रिकॉर्ड में नामों की संख्या और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या के बीच अंतर के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी होना बाकी है।
यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 189 कर्मचारियों वाला रिकॉर्ड किस उद्देश्य से तैयार किया गया है और क्या वह कंपनी में कार्यरत सभी कर्मचारियों की सूची है या किसी विशेष श्रेणी अथवा कार्यादेश से संबंधित विवरण है। दस्तावेजों की जांच के बिना इस अंतर के कारणों पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
एचपीसी दर से भुगतान की मांग, बकाया राशि का हिसाब मांगा
कर्मचारियों ने मांग की है कि पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों और संबंधित श्रेणी की निर्धारित दरों के अनुसार वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि एचपीसी दर के आधार पर उनका मासिक वेतन लगभग 22 हजार से 25 हजार रुपये तक हो सकता है। हालांकि, वास्तविक देय राशि कर्मचारी की श्रेणी, काम की प्रकृति, लागू समझौते, उपस्थिति और अन्य निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगी।
कर्मचारियों ने पिछले नौ महीनों के वेतन भुगतान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने और यदि किसी कर्मचारी की बकाया राशि बनती है, तो उसका भुगतान करने की मांग की है। उनका आरोप है कि उपस्थिति और अनुपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी वेतन निर्धारण को प्रभावित कर रही है। ऐसे में उपस्थिति रजिस्टर और वेतन रिकॉर्ड का मिलान कराना आवश्यक है, ताकि वास्तविक कार्य के अनुरूप भुगतान की स्थिति स्पष्ट हो सके।
एसईसीएल प्रबंधन की निगरानी पर सवाल
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों की शिकायतों के बीच एसईसीएल प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, कंपनी के अभिलेखों, उपस्थिति विवरण और वेतन भुगतान की स्थिति की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित कार्यादेश और लागू शर्तों के अनुसार कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है या नहीं।
यदि कर्मचारियों के आरोपों में तथ्य मिलते हैं, तो जिम्मेदार पक्षों से जवाब तलब कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर, यदि रिकॉर्ड में दर्ज 189 कर्मचारियों की सूची किसी सीमित श्रेणी से संबंधित है, तो प्रबंधन को इसका दस्तावेजी स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कंपनी और प्रबंधन का पक्ष आना बाकी
फिलहाल जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड और संबंधित एसईसीएल अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए वेतन भुगतान में अनियमितता और कर्मचारियों की संख्या में अंतर से जुड़े आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर ही हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नौ महीने से वेतन को लेकर परेशान कर्मचारियों की शिकायतों पर कार्रवाई कब होगी? क्या कंपनी एचपीसी दर के अनुसार भुगतान की स्थिति स्पष्ट करेगी और एसईसीएल प्रबंधन कर्मचारी रिकॉर्ड की जांच कराएगा, या कर्मचारियों को अपने अधिकारों की मांग के लिए आगे भी आंदोलन करना पड़ेगा?
650 कर्मचारियों से काम, रिकॉर्ड में महज 189 नाम! जय अंबे कंपनी में वेतन भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
By: संतोष चौरसिया संपादक (कोयलांचल न्यूज )
On: Thursday, October 29, 2026 8:25 AM







































































