47 दिनों के आतंक का अंत: रामपुर के जंगल में खतरनाक बिगड़ैल दंतैल हाथी रेस्क्यू, अनूपपुर-शहडोल के लोगों ने ली राहत की सांस

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47 दिनों के आतंक का अंत: रामपुर के जंगल में खतरनाक बिगड़ैल दंतैल हाथी रेस्क्यू, अनूपपुर-शहडोल के लोगों ने ली राहत की सांस

रिपोर्टर : शशिधर अग्रवाल | कोयलांचल समाचार के लिए

अनूपपुर, 20 मई।
अनूपपुर एवं शहडोल जिले में पिछले 47 दिनों से आतंक का पर्याय बने खतरनाक बिगड़ैल दंतैल हाथी को आखिरकार बुधवार शाम बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की विशेष रेस्क्यू टीम ने सफल अभियान चलाकर रामपुर के जंगल से सुरक्षित कैद कर लिया। हाथी के रेस्क्यू की खबर मिलते ही दोनों जिलों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इस हाथी के हमलों में अब तक चार लोगों एवं आठ पालतू मवेशियों की मौत हो चुकी थी, जबकि दो बच्चों सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

वन विभाग एवं हाथी विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 18 से 22 वर्ष आयु का यह दंतैल हाथी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल अंतर्गत जडगा वन परिक्षेत्र में सात माह से डेरा डाले 48 से अधिक हाथियों के समूह का सदस्य था। संभावना जताई जा रही है कि समूह में विवाद के बाद यह हाथी अलग होकर गुस्से की स्थिति में मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश कर गया था।

जानकारी के अनुसार 2 अप्रैल की रात यह हाथी मनेन्द्रगढ़-मरवाही क्षेत्र से होते हुए अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र में पहुंचा और धीरे-धीरे भोलगढ़, सोनमौहरी, पोंडी, खांड़ा, पिपरिया, सेवादार, कुसुमहाई सहित कई गांवों में तबाही मचाता रहा। दिन में जंगलों में छिपा रहने वाला यह हाथी रात होते ही गांवों की ओर निकल पड़ता था और खेत, घर, बाड़ी एवं मवेशियों को नुकसान पहुंचाने के साथ ग्रामीणों में दहशत फैलाता रहा।

हाथी के हमलों की सबसे दर्दनाक घटनाओं में 2 अप्रैल को मरवाही क्षेत्र के डडिया गांव के पास महुआ बीनने गए एक ग्रामीण की मौत, 26 अप्रैल को कुरियारी जंगल में महिला प्रेमवती पाव की मौत, 30 अप्रैल को कुसुमहाई गांव में जानकी कोल की मौत तथा 13 मई को गिरवा गांव में छोटेलाल सिंह एवं एक मवेशी की मौत शामिल रही। इसके अलावा कई गांवों में मवेशियों को कुचलकर मार डाला गया।

लगातार बढ़ते आतंक के कारण करीब 20 से 25 गांवों के लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर थे। ग्रामीणों का कहना था कि हाथी कभी भी अचानक गांव में घुस आता था, जिससे महिलाओं और बच्चों में भारी भय व्याप्त था। वन विभाग लगातार मुनादी, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील करता रहा, लेकिन हाथी लगातार कई किलोमीटर की दूरी तय कर लोगों को चकमा देता रहा।

स्थिति गंभीर होने पर जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से हाथी को तत्काल रेस्क्यू कर क्षेत्र से बाहर ले जाने की मांग की थी। इसके बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय एवं मुख्य वन संरक्षक एम.पी. सिंह के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू अभियान तैयार किया गया।

सोमवार रात से रामपुर बीट अंतर्गत बेलिया गांव के समीप अभियान शुरू किया गया। मंगलवार दोपहर हाथी की लोकेशन मिलने के बाद बांधवगढ़ के प्रशिक्षित हाथी ‘रामा’, ‘लक्ष्मण’ एवं ‘सूर्या’ की मदद से डॉक्टरों एवं रेस्क्यू टीम ने घने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों की मशक्कत के बाद बुधवार शाम हाथी को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर रेस्क्यू स्थल तक लाया गया।

रेस्क्यू अभियान को लेकर पिछले कुछ दिनों से ग्रामीणों में यह आशंका थी कि वन विभाग हाथी को केवल कॉलर आईडी लगाकर पुनः जंगल में छोड़ सकता है, जिससे फिर से खतरा बढ़ सकता था। लेकिन हाथी को सुरक्षित कैद किए जाने के बाद लोगों ने राहत व्यक्त की।

इधर वन विभाग ने बताया कि चार अन्य हाथियों का समूह अभी भी छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र की ओर विचरण कर रहा है और संभावना है कि वह पुनः अपने मूल समूह में शामिल हो जाए।

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने हाथी के हमलों में जान गंवाने वाले परिवारों तथा नुकसान झेलने वाले किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। साथ ही राजस्व एवं वन विभाग से संवेदनशीलता के साथ राहत प्रकरण तैयार कर समय पर मुआवजा दिए जाने की अपील भी की गई है।

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