योग से आत्मिक उन्नति और स्वस्थ जीवन का मिला संदेश, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में भव्य रूप से मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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योग से आत्मिक उन्नति और स्वस्थ जीवन का मिला संदेश, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में भव्य रूप से मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल बोले — योग व्यक्ति की चेतना को सार्वभौमिक चेतना से जोड़ने का अद्भुत माध्यम

अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के योग संकाय द्वारा 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित महर्षि पतंजलि भवन में किया गया। योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को समर्पित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग को दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में धारकुंडी आश्रम (अमरकंटक शाखा) के स्वामी लवलीन जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं महर्षि पतंजलि की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रसारित संबोधन को भी सुना।

योग संकाय के अधिष्ठाता प्रो. जितेंद्र कुमार शर्मा एवं संकाय सदस्यों डॉ. प्रवीण कुमार गुप्ता, डॉ. श्याम सुंदर पाल, डॉ. संदीप ठाकरे तथा डॉ. नीलम श्रीवास्तव ने अतिथियों का शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

अपने स्वागत उद्बोधन में प्रो. जितेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जीवन में संतुलन प्रदान करता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की क्रिया नहीं है, बल्कि यह आत्मिक विकास और परम चेतना की प्राप्ति का मार्ग है। योग के माध्यम से मनुष्य स्वयं को प्रकृति और सार्वभौमिक चेतना से जोड़ सकता है।

मुख्य अतिथि स्वामी लवलीन जी महाराज ने अपने उद्बोधन में नियमित योगाभ्यास एवं प्रणव साधना (ॐकार जप) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैदिक ज्ञान और योग की परंपरा मनुष्य को अनुशासित, संयमित एवं सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम के दौरान कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास डॉ. श्याम सुंदर पाल एवं डॉ. संदीप ठाकरे के निर्देशन में कराया गया। इस योग सत्र में विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन योग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रवीण कुमार गुप्ता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय की उपकुलसचिव डॉ. पूजा तिवारी द्वारा प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर डॉ. राकेश सोनी, डॉ. सुशील कुमार सिंह, उपकुलसचिव डॉ. संजीव सिंह, सहायक कुलसचिव गिरिजेश सिंह, डॉ. संतोष गुप्ता, दिनेश तिवारी सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन शैली का संदेश दिया।

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