तीन दिन से गहरे गोफ में फंसा था बछड़ा, दो घंटे के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित निकाला
कोतमा कॉलरी क्षेत्र में भूमिगत खनन के बाद बने खतरनाक गोफ बने चुनौती, बारिश में बढ़ा हादसों का खतरा

कोतमा। कॉलरी क्षेत्र में भूमिगत खनन के बाद डिप्लेरिंग नहीं किए जाने से जगह-जगह बने बड़े-बड़े गोफ अब इंसानों के साथ-साथ मवेशियों और वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। रविवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब करीब तीन दिनों से गहरे गोफ में फंसे गाय के बछड़े को नगर पालिका, वन विभाग और कॉलरी प्रबंधन की संयुक्त टीम ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। बछड़े को बाहर निकालने के बाद उपचार के लिए पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया।
जंगल में पुट्टू बीनने गए युवकों ने सुनी बछड़े की आवाज
बताया गया कि रविवार सुबह दो युवक जंगल क्षेत्र में पुट्टू बीनने के लिए गए थे। इसी दौरान उन्हें आसपास से किसी जानवर के लगातार पुकारने की आवाज सुनाई दी। आवाज का पीछा करते हुए जब दोनों युवक मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक गाय का बछड़ा गहरे गोफ में फंसा हुआ है। बछड़ा बाहर निकलने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था, लेकिन गोफ की गहराई और आसपास की मिट्टी के कारण उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं थी।
युवकों ने तत्काल इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने बछड़े को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन गोफ की गहराई और जोखिम को देखते हुए प्रशासन एवं संबंधित विभागों को सूचना दी गई।
संयुक्त टीम ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलने के बाद नगर पालिका, वन विभाग और कॉलरी प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू अभियान के लिए जेसीबी, रस्सियों सहित अन्य आवश्यक संसाधन मौके पर मंगाए गए। इसके बाद एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने बछड़े को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान शुरू किया।
रेस्क्यू के दौरान गोफ की गहराई और आसपास की कमजोर मिट्टी के कारण टीम को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। करीब दो घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद कर्मचारियों ने बछड़े को गोफ से बाहर निकाल लिया। बछड़े के सुरक्षित बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
उपचार के लिए पशु चिकित्सक के पास पहुंचाया
गोफ से बाहर निकाले जाने के बाद बछड़ा काफी कमजोर और घायल अवस्था में था। रेस्क्यू टीम ने उसे तत्काल उपचार के लिए पशु चिकित्सक के पास पहुंचाया। समय रहते रेस्क्यू होने से बछड़े की जान बच गई।
इस घटना ने एक बार फिर कॉलरी क्षेत्रों में भूमिगत खनन के बाद छोड़े गए गोफ और गड्ढों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसे कई स्थान हैं, जहां खनन के बाद बने गोफ अभी भी खुले पड़े हैं और बारिश के मौसम में इनमें पानी भर जाने के बाद खतरा और बढ़ जाता है।
बारिश से पहले नहीं भरे गए खतरनाक गोफ
जानकारी के अनुसार कॉलरी क्षेत्र में भूमिगत खनन के बाद बने बड़े-बड़े गड्ढों और गोफ को बारिश शुरू होने से पहले भरना आवश्यक माना जाता है। इसके लिए लाखों रुपये के टेंडर जारी किए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन कई स्थानों पर अब तक गोफ और गड्ढे खुले पड़े हैं।
बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भरने से उनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मवेशियों के साथ-साथ जंगल में आने-जाने वाले ग्रामीणों और अन्य लोगों के लिए भी गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। खुले गोफ वन क्षेत्र में रहने वाले वन्यजीवों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कॉलरी क्षेत्र में ऐसे सभी खतरनाक गोफ और गड्ढों को चिह्नित कर तत्काल भरने की कार्रवाई की जाए। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था भी की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सर्वे के आधार पर होगी वैधानिक कार्रवाई
वन विभाग के परिक्षेत्र सहायक कोतमा जेडी धारवे ने बताया कि सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अन्य विभागों के सहयोग से बछड़े का सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया। उन्होंने बताया कि जंगल क्षेत्र का सर्वे कराया जाएगा और सर्वे के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बछड़े के रेस्क्यू के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कॉलरी क्षेत्र में खुले पड़े ऐसे खतरनाक गोफ को आखिर कब तक भरा जाएगा। एक मवेशी के गोफ में फंसने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समय रहते इन खतरनाक गड्ढों को सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।




























































