सुरक्षित मन से सुरक्षित खदान की ओर एसईसीएल की नई पहल

---Advertisement---

सुरक्षित मन से सुरक्षित खदान की ओर एसईसीएल की नई पहल

‘माइंड सेफ्टी’ को बनाया खदान सुरक्षा का आधार, ‘इनर एक्सीलेंस सीरीज़’ का शुभारंभ

बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर में कर्मचारियों की मानसिक मजबूती, सकारात्मक कार्य संस्कृति और खदानों में सुरक्षित कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “सुरक्षित मन, सुरक्षित खदान” विषय पर प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय अभियान “पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन” के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मानसिक सुरक्षा को कार्यस्थल की सुरक्षा से जोड़ते हुए सकारात्मक सोच, आत्मविकास और तनावमुक्त कार्यशैली का संदेश दिया गया। इस अवसर पर कर्मचारियों के व्यक्तित्व विकास एवं कार्यस्थल पर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए “एसईसीएल–इनर एक्सीलेंस सीरीज़” का भी विधिवत शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन एसईसीएल एवं ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स विंग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स विंग के राष्ट्रीय समन्वयक बी.के. पीयूष भाई उपस्थित रहे। इस दौरान निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र, ब्रह्माकुमारीज़ की बीके मंजू दीदी सहित मुख्यालय एवं विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में बी.के. पीयूष भाई ने कहा कि “माइंड सेफ्टी ही माइन सेफ्टी की सबसे मजबूत नींव है।” उन्होंने कहा कि किसी भी खदान की वास्तविक सुरक्षा केवल आधुनिक मशीनों और तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वहां कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी के संतुलित, सकारात्मक और जागरूक मन पर आधारित होती है। उन्होंने कर्मचारियों से वर्तमान में जीने, सकारात्मक सोच अपनाने, स्मार्ट वर्क करने, सौ प्रतिशत समर्पण के साथ कार्य करने तथा नियमित मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि मानसिक रूप से सशक्त कर्मचारी न केवल दुर्घटनाओं की संभावना को कम करता है, बल्कि कार्यस्थल पर बेहतर उत्पादकता और सामूहिक सफलता भी सुनिश्चित करता है।

एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कर्मचारियों को आत्मविकास का संदेश देते हुए कहा कि “स्वयं को बेहतर बनाइए, राष्ट्र निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दीजिए।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी यदि प्रतिदिन स्वयं को पहले से बेहतर बनाने का संकल्प ले और पूरी निष्ठा, ईमानदारी तथा सकारात्मक सोच के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे, तो संस्था की प्रगति के साथ-साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने सुरक्षित कार्य संस्कृति को एसईसीएल की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुरक्षा को एक-दूसरे का पूरक बताया।

कार्यक्रम के दौरान “एसईसीएल–इनर एक्सीलेंस सीरीज़” का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से कर्मचारियों में नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति विकसित करने के लिए विभिन्न प्रेरक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन के प्रति सामूहिक शपथ दिलाई गई। साथ ही विशेष मेडिटेशन सत्र का आयोजन कर प्रतिभागियों को मानसिक शांति, तनाव प्रबंधन, एकाग्रता तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सुरक्षित, स्वस्थ और सकारात्मक कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। एसईसीएल प्रबंधन का मानना है कि मानसिक रूप से सशक्त कर्मचारी ही सुरक्षित, उत्पादक और उत्कृष्ट कार्य वातावरण का निर्माण कर सकते हैं, जिससे संगठन की कार्यक्षमता और खदानों की सुरक्षा दोनों को नई मजबूती मिलेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment