अनूपपुर,7 जून 2026/ अनूपपुर जिले के जनपद पंचायत जैतहरी के ग्राम सकरा निवासी आदिवासी तेरसिया बैगा के नवजात शिशु की आंखों की रोशनी जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग की पहल पर समय पर इलाज मिलने से बच गई। बच्चे का जन्म समय से पूर्व और बेहद कम वजन के साथ हुआ था।
समय पूर्व जन्म के कारण बच्चे की आंखों का विकास पूरा नहीं हो पाया था। जांच में पता चला कि रेटिना की खून की नलियां असामान्य रूप से विकसित हो गई थीं। चिकित्सकों के अनुसार यह रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी की स्थिति थी, जिसमें रेटिना के उखड़ने और संकुचित होने का खतरा रहता है। समय पर इलाज न मिलने पर बच्चा स्थायी रूप से दृष्टिहीन हो सकता था।
इलाज बना चुनौती
इस गंभीर समस्या का उपचार किसी बड़े प्राइवेट आई हॉस्पिटल में ही संभव था। लेकिन इलाज का खर्च लाखों में था, जिसे तेरसिया बैगा का परिवार वहन करने में असमर्थ था।
प्रशासन बना मददगार
नेत्र विभाग, जिला चिकित्सालय अनूपपुर ने मामले को गंभीरता से लिया। जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ जनक सारीवान ने राज्य स्तर के अधिकारियों से समन्वय कर बच्चे को सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट रेफर कराया। वहां बच्चे का पूरा इलाज नि:शुल्क किया गया।
अब सुरक्षित हैं आंखें
इलाज के बाद अब बच्चे की आंखें पूरी तरह सुरक्षित हैं और दृष्टि के विकास की प्रक्रिया सामान्य है। बच्चे के परिजनों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय का आभार जताया है।
जिला चिकित्सालय के नेत्र सर्जन एवं रेटीना विशेषज्ञ डॉ जनक सारीवान ने बताया कि समय पूर्व जन्मे कम वजन के बच्चों में आरओपी (ROP) की जांच अनिवार्य है। जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है ताकि समय रहते इलाज कर बच्चों की रोशनी बचाई जा सके।





































