सड़क किनारे घायल मिली गौ माता, युवाओं ने पहुंचाया गौ सेवा आश्रम
चचाई में मानवीय संवेदना की मिसाल, समय पर मदद मिलने से घायल पशु को मिला उपचार का सहारा
अनूपपुर। मानवीय संवेदना और पशु सेवा की मिसाल पेश करते हुए समाजसेवी युवक एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला मंत्री सेम राजपूत ने अपने साथियों के सहयोग से सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़ी गौ माता को धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम पहुंचाया। समय रहते मदद मिलने से घायल गौ माता के उपचार एवं देखभाल की व्यवस्था हो सकी। युवाओं की इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।
जानकारी के अनुसार बुधवार 19 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे चचाई निवासी राजेश मिश्रा ने सेम राजपूत को सूचना दी कि चचाई कॉलोनी के समीप एक गौ माता घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही सेम राजपूत तत्काल मौके पर पहुंचे और घायल गौ माता की स्थिति देखकर उसके उपचार की व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किए।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुए युवा
सेम राजपूत ने मामले की जानकारी धनपुरी गौ सेवा संस्थान के संस्थापक राम दुबे को दी। उन्होंने घायल गौ माता को तत्काल धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम पहुंचाने की बात कही, ताकि उसका समय पर उपचार कराया जा सके।
इसके बाद सेम राजपूत ने अपने निजी वाहन से अपने साथियों अश्वनी प्रताप सिंह, नवल साहू, हर्ष वाल्मीकि और गोलू राय की मदद ली। सभी युवाओं ने मिलकर घायल गौ माता को सुरक्षित रूप से वाहन में पहुंचाया और उसे धनपुरी स्थित गौ सेवा आश्रम ले गए। आश्रम पहुंचने के बाद गौ माता के उपचार एवं देखभाल की व्यवस्था की गई।
युवाओं की पहल की हो रही सराहना
घायल और बेसहारा पशु को सड़क किनारे छोड़ने के बजाय युवाओं द्वारा समय पर सहायता पहुंचाने की पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की। लोगों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से घायल होने वाले पशुओं की मदद के लिए समाज के अन्य युवाओं और नागरिकों को भी आगे आना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार अक्सर घायल पशु सड़क किनारे असहाय अवस्था में पड़े रहते हैं। ऐसे में यदि समय रहते उन्हें उपचार और सुरक्षित स्थान मिल जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। चचाई के युवाओं द्वारा किया गया यह प्रयास समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाला है।
गौ सेवा केवल दिखावा नहीं, संवेदना और जिम्मेदारी का प्रतीक
सेम राजपूत ने कहा कि गौ सेवा केवल दिखावे का कार्य नहीं, बल्कि संवेदना, जिम्मेदारी और निष्ठा का प्रतीक है। जरूरत के समय किसी जीव की सहायता करना ही सच्ची मानवता है। उन्होंने कहा कि कर्म ही निष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण है और गौ माता की सेवा करना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि घायल एवं बेसहारा पशुओं को देखकर केवल सहानुभूति व्यक्त करने के बजाय उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझकर जरूरतमंद जीव की सहायता करे तो कई बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सकती है।
पशु सेवा के साथ दिया मानवीय संवेदना का संदेश
सेम राजपूत और उनके साथियों द्वारा दिखाई गई तत्परता ने घायल गौ माता को उपचार का सहारा देने के साथ ही समाज में पशु सेवा और मानवीय संवेदना का संदेश भी दिया है। युवाओं ने यह साबित किया कि जरूरत के समय उठाया गया एक छोटा कदम भी किसी बेजुबान जीव के लिए जीवन बचाने वाली मदद साबित हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने सेम राजपूत सहित उनके साथियों के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में पशु सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रयास लगातार किए जाने चाहिए। खासकर युवाओं की ऐसी पहल अन्य लोगों को भी सेवा और संवेदना के कार्यों के लिए प्रेरित करती है।




































