साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी, एसईसीएल मुख्यालय में गूंजा डिजिटल सुरक्षा का संदेश

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साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी, एसईसीएल मुख्यालय में गूंजा डिजिटल सुरक्षा का संदेश

बिलासपुर पुलिस ने शुरू किया ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’, अधिकारियों-कर्मचारियों को साइबर ठगी के नए तरीकों से कराया अवगत

बिलासपुर, 24 अगस्त 2026। केंद्रीय सतर्कता आयोग के मार्गदर्शन में साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में संचालित तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के अंतर्गत सोमवार को एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘साइबर जागृति अभियान’ के साथ समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना, डिजिटल लेन-देन में आवश्यक सावधानियों से अवगत कराना तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देना रहा। इसी अवसर पर बिलासपुर पुलिस द्वारा ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ का शुभारंभ भी किया गया।

कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। बिलासपुर के उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। एसईसीएल की ओर से निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास तथा निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) श्री रमेश चंद्र महापात्र सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

बदलते स्वरूप के साइबर अपराधों पर दी जानकारी

मुख्य वक्ता श्री राम गोपाल गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सजग और सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया आधारित अपराध तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आगाह किया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, बैंक संबंधी जानकारी अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने अथवा अनजान व्यक्ति के निर्देश पर वित्तीय लेन-देन करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है।

श्री गर्ग ने साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध में समय पर शिकायत दर्ज कराने से पीड़ित की राशि को सुरक्षित करने की संभावना बढ़ जाती है।

साइबर सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी

पुलिस महानिरीक्षक श्री गर्ग ने ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक नागरिक स्वयं डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करे और अपने परिवार, सहकर्मियों तथा आसपास के लोगों को भी जागरूक करे, तो साइबर अपराधों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से कर्मचारियों से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय जल्दबाजी से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जागरूकता और सतर्कता को सबसे प्रभावी उपायों में से एक बताते हुए उन्होंने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

जागरूकता से ही साइबर अपराधों पर लगेगा अंकुश

विशिष्ट अतिथि श्री रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम में जन-जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान समय में बैंकिंग, खरीदारी, भुगतान, सरकारी सेवाओं और सोशल मीडिया सहित अनेक गतिविधियां डिजिटल माध्यमों से संचालित हो रही हैं। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी असावधानी भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर पीड़ित को घबराने के बजाय तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी देने का आह्वान किया।

सुशासन और पारदर्शिता से जुड़ी साइबर सुरक्षा

एसईसीएल में संचालित तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को सुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए तकनीकी उपायों के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं की जागरूकता भी आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों को फिशिंग संदेशों की पहचान, संदिग्ध लिंक से बचाव, सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा, डिजिटल भुगतान में सावधानियां, ओटीपी की गोपनीयता तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के संभावित तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।

सवाल-जवाब के जरिए दूर की जिज्ञासाएं

कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया। इस दौरान एसईसीएल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सुरक्षा, फिशिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित विभिन्न सवाल पूछे। विशेषज्ञों एवं पुलिस अधिकारियों ने सवालों के जवाब देते हुए व्यवहारिक सावधानियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने तथा अपने परिवार, सहकर्मियों और समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस कार्यक्रम के माध्यम से एसईसीएल मुख्यालय में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सतर्कता भी जरूरी है और साइबर अपराध से बचाव की पहली कड़ी स्वयं की जागरूकता है।

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