कलेक्टर की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि, विभाग की ‘क्लीन चिट’ पर उठे सवाल
मनेन्द्रगढ़। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत कथित रूप से नकली निम्न गुणवत्ता के मंगलसूत्र वितरण के मामले में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा की शिकायत जिला प्रशासन की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। जिला कलेक्टर मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की है वहीं जांच रिपोर्ट आने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, जिसमें पूरे मामले को निराधार बताया गया था, अब सवालों के घेरे में आ गई है।
सौरव मिश्रा ने 18 जून 2026 को जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर 10 फरवरी 2026 को विकासखंड खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वितरित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत में बताया गया था कि कार्यक्रम में 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था और बाद में कई नवविवाहित महिलाओं ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्हें चांदी के स्थान पर गिलेट अथवा निम्न गुणवत्ता वाले मंगलसूत्र दिये गये।
*जांच से पहले ही विभाग ने दे दी थी क्लीन चिट*
शिकायत के बाद कलेक्टर ने जांच समिति गठित की लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सोशल मीडिया पर लगाये गये आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए पूरे मामले को निराधार घोषित कर दिया। अब कलेक्टर की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह प्रश्न उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन की जांच जारी थी, तब विभाग ने किस आधार पर पूरे मामले को क्लीन चिट दे दी।
कलेक्टर की जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
19 जून 2026 को जिला कलेक्टर द्वारा संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजे गये पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि जांच समिति के प्रतिवेदन के अनुसार शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के लिये 92 लाख रुपयों का आबंटन प्राप्त हुआ था। प्रति हितग्राही 50 हजार रुपये के प्रावधान में से 35 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में और शेष राशि विवाह आयोजन और उपहार सामग्री पर व्यय की जानी थी। उपहार सामग्री में प्रति जोड़ा 7 हजार रुपये के अंतर्गत चांदी का मंगलसूत्र भी शामिल था। जांच में पाया गया कि जिला स्तरीय क्रय समिति ने स्पष्ट रूप से चांदी का मंगलसूत्र खरीदने और प्राथमिकता से GeM पोर्टल के माध्यम से खरीद करने की अनुशंसा की थी लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी ने समिति की अनुशंसा के विपरीत सीमित निविदा के माध्यम से खरीद की। कोटेशन प्रक्रिया, क्रय समिति की स्वीकृति, भौतिक सत्यापन और भुगतान से पूर्व आवश्यक अनुमोदन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
शिकायत के बाद भुगतान में की गई कटौती
जांच रिपोर्ट के अनुसार गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने के बाद संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र एक हजार रुपये की कटौती की गई और कुल 1 लाख 84 हजार रुपये हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित किये गये। इसके बाद फर्म को लगभग 12.85 लाख रुपयों का भुगतान किया गया।इससे यह सवाल और गहरा गया कि यदि शिकायत पूरी तरह निराधार थी तो भुगतान में कटौती और हितग्राहियों को राशि लौटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
अधिकारी पर कार्यवाही की अनुशंसा
जांच समिति ने निष्कर्ष में कहा कि जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा द्वारा क्रय समिति की अनुशंसाओं की अवहेलना की गई। चांदी के स्थान पर अन्य प्रकार के मंगलसूत्र वितरित किये गये। खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और बिना आवश्यक अनुमोदन के भुगतान किया गया। समिति ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की है।
कांग्रेसियों ने उठाये जवाबदेही के सवाल
सौरव मिश्रा ने कहा कि अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब कलेक्टर की जांच में शिकायत सही पाई गई तब जांच पूरी होने से पहले विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की जिम्मेदारी कौन तय करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही करने और जांच से पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल ने कहा कि यह मामला गरीब बेटियों के सम्मान और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए दोषियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिये। जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री पूनम सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट ने शिकायत को सही साबित कर दिया है और अब सरकार को दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही कर जवाबदेही तय करनी चाहिये। पूर्व जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष रूमा चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के सम्मान से जुड़ी योजना है इसलिए इसमें हुई किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पार्षद किरण कुजूर ने कहा कि जांच समिति द्वारा शिकायत सही पाये जाने के बाद सरकार को बिना विलंब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिये ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। पूर्व पार्षद हमीदा खातून ने जांच पूरी होने से पहले जारी विभागीय प्रेस विज्ञप्ति की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। पूर्व महिला कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शोभना वर्मा ने कहा कि यह मामला नवविवाहित महिलाओं के सम्मान और शासन की पारदर्शिता से जुड़ा है तथा दोषियों को किसी भी स्थिति में बचाया नहीं जाना चाहिये।



































