करोड़ों का कोयला, बदहाल सड़क: बदरा-कुशियारा मार्ग बना जानलेवा, जिम्मेदारों की चुप्पी पर जनता में आक्रोश

जमुना कोतमा। देश को ऊर्जा देने वाले कोयलांचल की तस्वीर एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोल रही है। एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बदरा-कुशियारा का मुख्य मार्ग पहली ही बारिश में दलदल और तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जगह-जगह जलभराव, गहरे गड्ढे और कीचड़ के कारण राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर घायल हो रहे हैं, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं
विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र से वर्षों से करोड़ों रुपये का कोयला उत्पादन हो रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं और सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन जिस सड़क से यह संपदा निकलती है, उसकी बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति “दिया तले अंधेरा” कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करती है
ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल और मोजर बेयर विद्युत उत्पादन कंपनी, जैतहरी के बीच हुए समझौते के बाद राखड़ से भरे भारी-भरकम हाईवा वाहनों की लगातार आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसके बावजूद न तो एसईसीएल, न लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और न ही जनप्रतिनिधियों ने सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल की है
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में करोड़ों का राजस्व देने वाला यह क्षेत्र आज मूलभूत सड़क सुविधा के लिए तरस रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क का निर्माण एवं मरम्मत नहीं कराई गई तो जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी
ग्रामीणों ने एसईसीएल के महाप्रबंधक, ग्राम पंचायत, पीडब्ल्यूडी तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल सड़क का स्थायी निर्माण कराने, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने और भारी वाहनों के कारण हुई क्षति की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश को ऊर्जा देने वाले इस क्षेत्र के लोगों को बदले में बदहाल सड़कें और उपेक्षा नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
































