क्रिटिकल मिनरल्स की खोज में भारत-अमेरिका की नई साझेदारी, सीएमपीडीआई ने ड्यूक विश्वविद्यालय से मिलाया हाथ

---Advertisement---

क्रिटिकल मिनरल्स की खोज में भारत-अमेरिका की नई साझेदारी, सीएमपीडीआई ने ड्यूक विश्वविद्यालय से मिलाया हाथ

ओवरबर्डन, कोयला रिजेक्ट, फ्लाई ऐश और अम्लीय खान जल से REE, लिथियम व ग्रेफाइट की संभावित पुनर्प्राप्ति पर होगा शोध

रांची, 11 अगस्त। भारत के खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स की संभावनाओं को तलाशने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) ने महत्वपूर्ण पहल की है। सीएमपीडीआईएल ने क्रिटिकल मिनरल्स एवं सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग के लिए अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित होगी।

पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा समझौता

सीएमपीडीआईएल और ड्यूक विश्वविद्यालय के बीच हुआ यह समझौता हस्ताक्षर की तिथि से पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत दोनों संस्थान पारस्परिक हित के क्षेत्रों में शोध, तकनीकी विकास और क्षमता निर्माण के लिए मिलकर काम करेंगे।

अमेरिका का ड्यूक विश्वविद्यालय एक अग्रणी वैश्विक शोध संस्थान है, जिसकी इंजीनियरिंग, पर्यावरण विज्ञान, भू-विज्ञान, ऊर्जा प्रणालियों, नीतिगत अध्ययन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में मजबूत अंतर्विषयक विशेषज्ञता है। वहीं सीएमपीडीआईएल भारत में खनन, भू-विज्ञान और तकनीकी परामर्श के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत है।

खनन के अवशेषों में तलाशे जाएंगे बहुमूल्य खनिज

इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य कोयला एवं खनन से संबंधित द्वितीयक संसाधनों में मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स की संभावनाओं का आकलन करना है। इसके तहत ओवरबर्डन, कोयला रिजेक्ट, फ्लाई ऐश और अम्लीय खान जल जैसे संसाधनों का अध्ययन किया जाएगा।

इन संसाधनों में मौजूद रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs), लिथियम और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान और संभावित पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे खनन गतिविधियों से निकलने वाले द्वितीयक संसाधनों के प्रभावी उपयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी और महत्वपूर्ण खनिजों के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

ड्यूक देगा वैज्ञानिक विशेषज्ञता, सीएमपीडीआई संभालेगा फील्ड ऑपरेशन

समझौते के तहत ड्यूक विश्वविद्यालय उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज लक्षण-निर्धारण, कार्यप्रणाली के विकास और प्रक्रिया अनुकूलन में अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। दूसरी ओर सीएमपीडीआई भारत में फील्ड ऑपरेशन, नमूना संग्रह, तकनीकी आंकड़े उपलब्ध कराने और संस्थागत समन्वय में सहयोग करेगा।

दोनों संस्थानों के बीच नमूनों के परीक्षण एवं सत्यापन, उन्नत भू-रासायनिक एवं खनिजीय लक्षण-निर्धारण तथा परीक्षण प्रोटोकॉल विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

डीकार्बोनाइजेशन और सतत ऊर्जा पर भी रहेगा फोकस

यह साझेदारी केवल क्रिटिकल मिनरल्स तक सीमित नहीं रहेगी। समझौते में कम-कार्बन और शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, डीकार्बोनाइजेशन के मार्ग, सतत ऊर्जा प्रणालियों, खदानों के पुनर्प्रयोजन और खनन के बाद भूमि उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया है।

इसके अलावा कोयला खदानों और परित्यक्त खदानों से संबंधित मीथेन की निगरानी, उसके शमन और उत्सर्जन में कमी के उपायों पर भी सहयोग किया जाएगा। खनन गतिविधियों से जुड़े कार्बन क्रेडिट के आकलन की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और भारतीय अनुभव का होगा समन्वय

सीएमपीडीआईएल और ड्यूक विश्वविद्यालय के बीच यह सहयोग भारत की खनन क्षेत्र में उपलब्ध विशेषज्ञता तथा वैश्विक स्तर की अनुसंधान क्षमताओं को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे क्रिटिकल मिनरल्स और सतत खनन के उभरते क्षेत्रों में नई तकनीकों, शोध और विशेषज्ञता के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

साझेदारी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सीएमपीडीआईएल की तकनीकी एवं परामर्श सेवाओं के क्षेत्र में विविधता लाने और विशेषज्ञता के नए क्षेत्रों को विकसित करने में भी यह समझौता मददगार साबित हो सकता है।

खनन के बाद संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में कदम

क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच खनन से निकलने वाले द्वितीयक संसाधनों में मौजूद उपयोगी खनिजों की पहचान और पुनर्प्राप्ति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ओवरबर्डन, कोयला रिजेक्ट, फ्लाई ऐश और अम्लीय खान जल जैसे संसाधनों का वैज्ञानिक अध्ययन भविष्य में खनिज संसाधनों के अधिकतम उपयोग का रास्ता खोल सकता है।

सीएमपीडीआईएल और ड्यूक विश्वविद्यालय की यह साझेदारी इसी दिशा में अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाएगी। इससे भारत में क्रिटिकल मिनरल्स के संभावित नए स्रोतों की पहचान, सतत खनन पद्धतियों के विकास और खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की दिशा में नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

August 11, 2026

August 11, 2026

August 11, 2026

August 11, 2026

August 11, 2026

August 11, 2026

Leave a Comment