कक्का की चौपाल
लाड़ली बहना के ₹1500 से रक्षाबंधन पर बाजार गुलजार
कैलाश पाण्डेय
गांव के सरपंच के दलान में शाम की चौपाल जमी थी। बाहर सावन की फुहार, बाजार से आती मिठाई की खुशबू और रक्षाबंधन की चहल-पहल के बीच कक्का, घसीटा, चौरंगी लाल और खबरी लाल बैठे थे। बात पहुंची लाड़ली बहना योजना के ₹1500 और त्योहार पर इसकी अहमियत की ।
घसीटा कक्का रक्षाबंधन पर गांव कस्बे के बाजार खूब गुलजार रहे। मिठाई और राखी की दुकानों पर बहनों की अच्छी भीड़ रही।
कक्का त्योहार है भाई लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बहनों के लिए लाड़ली बहना योजना के ₹1500 भी इस खुशी में बड़ा सहारा बन रहे हैं। तीज त्योहार पर जब खर्च बढ़ जाता है, तब अपने हाथ में कुछ पैसा होना बहुत मायने रखता है
चौरंगी लाल कक्का, मिठाई की दुकान पर तो बड़ा मजेदार नजारा देखा। पति बोला“भैया, एक पाव मिठाई देना।” बहन ने तुरंत कहा“एक पाव में क्या होगा? भैया भाभी और बच्चों के लिए एक किलो दीजिए।”
घसीटा अरे वाह पति एक पाव पर और बहन सीधे एक किलो पर
खबरी लाल यही बहन दीपावली पर पति के साथ आती है तो पूजा के लिए एक पाव मिठाई ही लेने की जिद करती है। पति एक किलो लेने को कहता रहे, लेकिन जवाब “पूजा के लिए एक पाव काफी है
कक्का हा…हा… त्योहार का उत्साह ही अलग होता है। लेकिन बात सिर्फ मिठाई की नहीं है। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर महिला के हाथ में आने वाले ₹1500 उसकी छोटी बड़ी जरूरतों और अपनी पसंद से खर्च करने का आत्मविश्वास देते हैं।
चौरंगी लाल इसीलिए रक्षाबंधन पर राखी, मिठाई, बच्चों के सामान और दूसरी जरूरतों की खरीदारी में भी उत्साह दिखाई दिया
कक्का सही कहा। ₹1500 किसी परिवार की सारी जरूरतें पूरी नहीं करते, लेकिन जरूरत के समय एक बहन के लिए बड़ा सहारा जरूर बन सकते हैं। त्योहार की खुशी हर घर तक पहुंचे, यही महत्वपूर्ण है।
घसीटा मतलब राखी भाई-बहन का रिश्ता मजबूत करे और लाड़ली बहना बहन का आत्मविश्वास
कक्का बिल्कुल राखी रिश्तों की डोर है और आर्थिक मजबूती आत्मसम्मान की
बाहर सावन की बारिश और बाजार की रोशनी के बीच चौपाल खत्म हुई, लेकिन कक्का की बात सबके मन में रह गई
त्योहार की असली मिठास तब है, जब आर्थिक तंगी के बीच रहने वाली बहन के चेहरे पर भी खुशी की मुस्कान हो।
































































