डिजनीलैंड मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, अव्यवस्थाओं से परेशान हो रहे लोग
झूला हादसे, पार्किंग से साइकिल चोरी, खुले बिजली के तार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के आरोप; एसडीएम बोले— सीएमओ से कराएंगे जांच
कोतमा। नगर के वार्ड क्रमांक 7 में संचालित डिजनीलैंड मेले की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और पुरुष पहुंच रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
आरोप है कि मेले में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से वाहनों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। बताया जा रहा है कि दो दिन पूर्व पार्किंग क्षेत्र से एक साइकिल चोरी हो गई, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
झूला टूटने से घायल हुआ परिवार
स्थानीय लोगों के अनुसार मेले में संचालित मशीनरी झूलों की नियमित तकनीकी जांच और सर्विसिंग नहीं की जा रही है। बताया गया कि दो दिन पहले झूला टूटने से जमुना कॉलरी निवासी एक परिवार के सदस्य घायल हो गए। घटना के बाद मेला प्रबंधन और पीड़ित परिवार के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। लोगों का कहना है कि ऐसे झूलों की नियमित जांच सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है।
प्रवेश शुल्क और टिकट पर उठे सवाल
मेले में आने वाले लाला गुप्ता और मो. रियाज अहमद सहित अन्य लोगों का कहना है कि प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 20 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि टिकट पर शासकीय अनुमति, कर अथवा अन्य आवश्यक विवरण अंकित नहीं हैं। लोगों का आरोप है कि प्रवेश शुल्क लेने के बावजूद मेले में पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है और लोगों को महंगे दाम पर पानी खरीदना पड़ रहा है।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
इन दिनों लगातार हो रही बारिश के कारण मेले में आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त शेड या सुरक्षित स्थान नहीं होने से छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भीगते हुए खड़ा रहना पड़ता है। कई बार अचानक बारिश होने पर भगदड़ जैसी स्थिति भी बन जाती है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप
सूत्रों के अनुसार मेले में कई स्थानों पर खुले बिजली के तार दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा फायर सेफ्टी की व्यवस्था, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), सुरक्षित पार्किंग, आपातकालीन निकास द्वार तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हैं। साथ ही शासकीय कर और अनुमति संबंधी नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को मेले की सुरक्षा, वैधानिक अनुमति और व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि किसी बड़े हादसे से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें।
इनका कहना है
“मेला में अव्यवस्था संबंधी जानकारी नहीं है। सीएमओ को निर्देशित कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— टी. आर. नाग, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कोतमा
















