ग्रामीण अंचलों की आवाज बनेगी पत्रकारिता, केटीयू और गोंडवाना विश्वविद्यालय ने मिलाया हाथ

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  • छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों के बीच हुआ समझौता, शोध, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के जरिये युवाओं को मिलेंगे नये अवसर

रायपुर। गांवों की समस्याओं, स्थानीय मुद्दों और ग्रामीण समाज की वास्तविक तस्वीर को व्यापक मंच प्रदान करने की दिशा में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ग्रामीण पत्रकारिता को मजबूत बनाने और दूरस्थ अंचलों के युवाओं को मीडिया के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने गोंडवाना विश्वविद्यालय गढ़चिरौली के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये हैं। इस पहल से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारिता शिक्षा, शोध और जमीनी स्तर पर मीडिया गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना, गांवों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना और ग्रामीण युवाओं को मीडिया के क्षेत्र में बेहतर अवसरों से जोड़ना है। इसके माध्यम से ग्रामीण परिवेश में काम करने वाले पत्रकारों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, शैक्षणिक गतिविधियों तथा व्यावहारिक अनुभव के नये अवसर उपलब्ध कराये जाएंगे।

केटीयू के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और ग्रामीण पत्रकारिता ही समाज की जमीनी सच्चाई को सामने लाने का सशक्त माध्यम है। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच यह सहयोग ऐसे पत्रकार तैयार करने में सहायक होगा जो संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ ग्रामीण विकास, जनसमस्याओं और सामाजिक बदलाव की कहानियों को सामने ला सके वहीं गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रशांत बोकारे ने इस समझौते को ग्रामीण पत्रकारिता के संवर्धन और उन्नयन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने इस सहयोग को दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और व्यावहारिक गतिविधियों के विस्तार के लिये महत्वपूर्ण माना।
एमओयू पर केटीयू के कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा और गोंडवाना विश्वविद्यालय गढ़चिरौली के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने हस्ताक्षर किये। समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से संगोष्ठी, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे। इन कार्यक्रमों को प्रत्यक्ष, ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यम से संचालित किया जायेगा ताकि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी, शिक्षक और पत्रकार भी इसका लाभ उठा सकें।

इस साझेदारी के तहत शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ फैकल्टी एक्सचेंज, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के माध्यम से ग्रामीण संचार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम किया जायेगा। इससे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ ग्रामीण समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा, डॉ. आशुतोष मंडावी सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। दोनों विश्वविद्यालयों की यह पहल ग्रामीण समाज की आवाज को व्यापक मंच देने और नई पीढ़ी को जमीनी पत्रकारिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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