टीवी टावर रोड स्थित दुर्गा मंदिर में जुटीं महिलाएं, विधि विधान से की पूजा अर्चना, चांद के दीदार के बाद पूरा किया व्रत
मनेन्द्रगढ़। पति पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पर्व गुरुवार को मनेन्द्रगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, सुखमय दांपत्य जीवन और परिवार की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हुए दिनभर निर्जला उपवास रखा।
करवा चौथ को लेकर महिलाओं में सुबह से ही खासा उत्साह नजर आया। शहर के टी.वी. टावर रोड क्षेत्र में पर्व की रौनक देखते ही बन रही थी। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर हाथों में आकर्षक मेहंदी रचाई और सोलह श्रृंगार कर पर्व की खुशियों में चार चांद लगाये। घरों में पूजा अर्चना की तैयारियां की गईं। शाम होते ही महिलाएं दुर्गा मंदिर में एकत्रित हुईं जहां विधि विधान से करवा माता की पूजा की गई। इस दौरान पंडित जी ने महिलाओं को करवा चौथ की व्रत कथा सुनाई और पर्व के धार्मिक महत्व से अवगत कराया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख शांति की कामना के लिये रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रदेव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है।

दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद महिलाओं को चंद्रोदय का बेसब्री से इंतजार रहा। हालांकि मौसम खराब रहने के कारण कई स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में महिलाओं ने भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण किया। कुछ महिलाओं ने पूजा की थाली में चंद्रमा का प्रतीक बनाकर तो कुछ ने देश के अलग अलग शहरों से परिचितों द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गये चंद्रमा के दर्शन संबंधी चित्रों के माध्यम से व्रत की परंपरा पूरी की। चंद्रदर्शन के बाद महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा और अपने पति का चेहरा देखा, चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित किया और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया।
इस अवसर पर पतियों ने भी अपनी जीवनसंगिनियों को उपहार भेंट कर उनके प्रेम, समर्पण और दिनभर की तपस्या के प्रति सम्मान प्रकट किया।
करवा चौथ का पर्व एक धार्मिक परंपरा के साथ साथ दांपत्य जीवन में आपसी विश्वास, प्रेम, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
इस प्रकार मनेन्द्रगढ़ में करवा चौथ का पर्व धार्मिक आस्था, पारंपरिक रीति रिवाजों और पारिवारिक उल्लास के बीच हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।






































































