गांधी-शास्त्री जयंती पर कांग्रेस ने दिया एकता और श्रम सम्मान का संदेश

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गांधी-शास्त्री जयंती पर कांग्रेस ने दिया एकता और श्रम सम्मान का संदेश

मनेन्द्रगढ़। गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ शहर ने हजारी चौक पर कार्यक्रम आयोजित कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धापूर्वक नमन किया। महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और शास्त्री जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम में श्रमिकों का सम्मान भी किया गया

कार्यक्रम में वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया साथ ही श्रम, सामाजिक समानता, आपसी भाईचारे और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया

जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि गांधी जी का जीवन सत्य और अहिंसा के माध्यम से समाज को दिशा देने का उदाहरण है वहीं शास्त्री जी ने सादगी और ईमानदारी को सार्वजनिक जीवन का आधार बनाया। दोनों महापुरुषों के जीवन से समाज को जिम्मेदारी और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा मिलती है। श्रमिकों का सम्मान इसी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से किया गया है। सौरव मिश्रा ने कहा कि गांधी जी ने समाज को सत्य, अहिंसा और सद्भाव का रास्ता दिखाया जबकि शास्त्री जी ने अनुशासन और राष्ट्रसेवा को अपने आचरण से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को याद करने का सबसे सार्थक तरीका उनके विचारों को व्यवहार में उतारना है। रफीक मेमन ने कहा कि गांधी जी का संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था बल्कि वे सामाजिक समरसता और समानता के भी पक्षधर थे

उनके विचार आज भी समाज को जोड़ने की प्रेरणा देते हैं।
सुरेंद्र पाल माखीजा ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जीवन प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्व के प्रति सजग रहने का संदेश देता है। बलबीर सिंह ने कहा कि गांधी जी ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और अधिकार पहुंचाने की बात कही। उनके विचारों में मानवता और समानता को विशेष स्थान मिला। आज भी इन मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। चुन्नू त्रिपाठी ने कहा कि शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश देश की सुरक्षा और अन्नदाता के महत्व को सामने रखता है। उन्होंने अपने जीवन से यह दिखाया कि सादगी के साथ भी प्रभावी नेतृत्व किया जा सकता है

रूमा चटर्जी ने कहा कि गांधी जी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के विचार केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं बल्कि आज के सामाजिक जीवन में भी उनकी उपयोगिता बनी हुई है। इन आदर्शों को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाना जरूरी है। निर्मला चतुर्वेदी ने कहा कि शास्त्री जी का सार्वजनिक जीवन ईमानदारी और सादगी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे जीवन मूल्यों से परिचित कराना समाज की जिम्मेदारी है। राजकुमार जैन ने कहा कि गांधी जी ने देश को एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उनका मानना था कि समाज की मजबूती आपसी विश्वास और सहयोग से होती है। उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता के लिये महत्वपूर्ण हैं

अमित पूरी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने अपने आचरण से राष्ट्रसेवा का अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी की सादगी और जिम्मेदारी की भावना आज के सार्वजनिक जीवन के लिये भी प्रेरणादायी है। रुक्मणी खोपरागढ़े ने कहा कि गांधी और शास्त्री दोनों का जीवन त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उनके बताये मूल्यों को जीवन में उतारा जाये

दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि गांधी जी का सत्य और अहिंसा का संदेश समाज में शांति और सद्भाव की नींव मजबूत करता है। उन्होंने सभी से इन मूल्यों को अपनाने की अपील की। शरण सिंह ने कहा कि श्रमिक अपने परिश्रम से समाज और अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। गांधी-शास्त्री जयंती पर श्रमिकों का सम्मान उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
टीपी सिंह ने कहा कि गांधी और शास्त्री का जीवन हमें सादगी, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रहित की सीख देता है। उन्होंने कहा कि जयंती समारोह तभी सार्थक होगा जब इन मूल्यों को जीवन में उतारने का प्रयास किया जाये

कार्यक्रम में रवि जैन, गोपाल गुप्ता, नीलिमा श्यामल, अभिषेक वर्मा, व्यंकटेश सिंह, स्नेहिल शुक्ला, शुभम सिंह, भावेश जैन, ममता रजक, अजीत सिंह, रामगोपाल यादव, संजय यादव, केडी, संतोष वर्मा, चंद्रमणि, देव, कृष्ण चौधरी, सुलेमान खान, साबिर खान और सोनू गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में आपसी भाईचारे, समानता और श्रम के सम्मान की भावना को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ

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