बरतराई शराब दुकान पर गंभीर सवाल: गांव-गांव पैकारी, स्कूल-मंदिर तक पहुंची शराब! प्रिंट रेट से अधिक वसूली के आरोप, आबकारी और पुलिस की कार्यप्रणाली कटघरे में

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बरतराई शराब दुकान पर गंभीर सवाल: गांव-गांव पैकारी, स्कूल-मंदिर तक पहुंची शराब! प्रिंट रेट से अधिक वसूली के आरोप, आबकारी और पुलिस की कार्यप्रणाली कटघरे में

अनूपपुर।
जिले के थाना राजनगर अंतर्गत संचालित अंग्रेजी शराब दुकान बरतराई एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है क्षेत्रीय ग्रामीणों का आरोप है कि शराब दुकान के ठेकेदार संदीप जायसवाल के प्रबंधक धीरज गुप्ता द्वारा कथित रूप से अपने लोगों के माध्यम से गांव-गांव अवैध शराब की पैकारी कराई जा रही है इससे न केवल आबकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिक वातावरण भी तेजी से दूषित होता जा रहा है

ग्रामीणों का कहना है कि नियमानुसार शराब की बिक्री केवल लाइसेंसी दुकान से ही की जा सकती है, लेकिन इसके विपरीत भलवाही, बानीखाड़, निमहा, टीमकी टोला, फुलकोना, आमांडांड सहित चौहान ढाबा के आसपास और सैकड़ों गांवों में कथित रूप से अवैध तरीके से शराब पहुंचाई जा रही है। आरोप है कि सुबह से ही ठेकेदार के लोग बोरियों में शराब भरकर चार पहिया और दो पहिया वाहनों से गांवों तक सप्लाई करते हैं

शिकायतकर्ता राकेश मिश्रा उर्फ चरकू ने बताया कि बरतराई अंग्रेजी शराब दुकान से बाकायदा सुबह से ही भगवान दास केवट मामू आमांडॉड मंदिर के पास रंजीत जैसवाल दरोगा गुप्ता मीरा कंपलेक्स चौहान टंकी के बगल से जीवन लाल केवट दुर्गेश केवट फुलवारी टोला खोडरी में राजू के अलावा सैकड़ो लोगों द्वारा अवैध शराब की बिक्री की जा रही है वह अभी खुलेआम उच्च अधिकारियों से कार्यवाही की मांग की गई है

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शराब की बिक्री स्कूलों, मंदिरों के आसपास, किराना दुकानों और रिहायशी इलाकों तक में की जा रही है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल आबकारी अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों और युवाओं के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में आसानी से शराब उपलब्ध होने के कारण नशाखोरी तेजी से बढ़ रही है और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है।

ग्राहकों का यह भी आरोप है कि शराब की बिक्री निर्धारित प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर की जा रही है। नियमों के अनुसार उपभोक्ता से बोतल पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक राशि नहीं ली जा सकती, लेकिन कथित तौर पर खुलेआम अतिरिक्त वसूली की जा रही है। इससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत कई बार आबकारी विभाग, पुलिस प्रशासन और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से की जा चुकी है। मीडिया में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित हुईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। यही कारण है कि लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसके संरक्षण में यह कथित अवैध कारोबार संचालित हो रहा है

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध पैकारी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा यदि प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूले जाने और अवैध बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए

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