भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रस्ताव वापस लेने की मांग की, आंदोलन की चेतावनी
अनूपपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल का नाम बदलने संबंधी कार्य परिषद के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतुल्ला भोपाली का अपमान बताया है। पार्टी ने मध्य प्रदेश सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार करने की मांग की है।
भाकपा के मध्य प्रदेश सहायक राज्य सचिव विजेंद्र सोनी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मौलाना बरकतुल्ला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन अग्रणी क्रांतिकारियों में थे जिन्होंने देश से बाहर रहकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष किया। उनके योगदान के सम्मान में वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था।
उन्होंने कहा कि भोपाल में जन्मे बरकतुल्ला बहुभाषी विद्वान, शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी थे। उन्होंने इंग्लैंड, जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान सहित कई देशों में रहकर भारत की आजादी के लिए अभियान चलाया। वे गदर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे तथा प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान बर्लिन समिति से जुड़े। वर्ष 1915 में काबुल में गठित भारत की पहली निर्वासित अस्थायी सरकार में उन्होंने प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।
विजेंद्र सोनी ने कहा कि बरकतुल्ला ने धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्रीय मुक्ति के संघर्ष को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया और जीवनभर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्षरत रहे।
भाकपा ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के साथ अन्याय बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। पार्टी ने सभी विपक्षी दलों, शैक्षणिक संस्थाओं, बुद्धिजीवियों एवं जनसंगठनों से इस प्रस्ताव के विरोध में एकजुट होने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेशभर में इसका विरोध करेगी।



































