अब सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू होगा राज्य का पाठ्यक्रम
अनूपपुर 6 जून 2026/शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की धारा 29 (2) के तहत जिले के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम और मूल्यांकन व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय द्वारा महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, सत्र 2026-27 से जिले की सभी शासकीय, मान्यता प्राप्त अशासकीय (निजी) शालाओं, अनुदान प्राप्त स्कूलों और डाइस कोड प्राप्त मदरसों में कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन अनिवार्य रूप से राज्य सरकार द्वारा विहित (SCERT) पाठ्यपुस्तकों के आधार पर ही किया जाएगा। पूर्व के सत्रों में निजी स्कूलों को भाषा विषयों के लिए मिलने वाली एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों के चयन की सुविधा को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
यह निर्णय विगत सत्रों में परीक्षा संचालन के दौरान आई गंभीर व्यावहारिक कठिनाइयों और विसंगतियों को देखते हुए लिया गया है। पूर्व में अशासकीय शालाओं द्वारा भाषा विषयों (हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत) के लिए SCERT या NCERT के विकल्प चयन में बड़े पैमाने पर त्रुटियां की गई थीं, जिसके कारण परीक्षा के दौरान छात्रों को गलत प्रश्नपत्र मिलने की स्थिति निर्मित हुई। इससे न केवल परीक्षार्थियों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए थे। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा निजी स्कूलों को दी गई यह रियायत भी एक सीमित समयावधि के लिए थी, जिसे अब छात्र हित में आगे न बढ़ाते हुए पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मध्य प्रदेश राजपत्र के प्रावधानों के तहत कक्षा 5वीं और 8वीं में ‘डिटेंशन पॉलिसी’ (उसी कक्षा में रोकने का प्रावधान) पूरी तरह प्रभावी है। इसके अंतर्गत वार्षिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों को अतिरिक्त शिक्षण प्रदान कर पुनर्परीक्षा (Re-exam) का अवसर दिया जाएगा, लेकिन यदि छात्र पुनर्परीक्षा में भी अनुत्तीर्ण रह जाता है, तो उसे उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने सभी संकुल प्राचार्यों और शाला प्रमुखों को इन निर्देशों का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी स्वयं शाला प्रबंधन की होगी।






































