संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक मध्यप्रदेश की प्रमुख धार्मिक , आध्यात्मिक एवं पुण्यभूमी में वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पावन मोहिनी एकादशी दिन सोमवार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र शुभ भद्रा स्थिति चंद्रमा की अनुकूल स्थिति विक्रम संवत 2083 सूर्य के उत्तरायण तथा बसंत से ग्रीष्म ऋतु के संक्रमण काल के पावन अवसर पर श्रद्धा , भक्ति और सनातन परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला । प्रातःकाल से ही मां नर्मदा उद्गम स्थल , प्राचीन मंदिरों एवं विभिन्न देवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोगों ने सभी मंदिरों में पूजन-अर्चन किया इसके अलावा
विशेष रूप से नर्मदा उद्गम मंदिर , श्री ज्वालेश्वर महादेव , प्राचीन कलचुरी मंदिर समूह , कपिलधारा क्षेत्र तथा अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भक्तों की विशेष भीड़ देखी गई । महिलाओं ने निर्जला एवं फलाहार व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि , संतान मंगल और अखंड सौभाग्य की कामना की । अनेक श्रद्धालुओं ने अन्नदान , जलदान , वस्त्रदान तथा गौसेवा कर पुण्य लाभ अर्जित किया ।
वैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी , पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र , भद्रा एवं शुभ ज्योतिषीय संयोग में हुआ विशेष पूजन-अर्चन
पं. मुकेश पाठक ने बताया कि सूर्य के उत्तरायण काल में वैशाख शुक्ल एकादशी का विशेष महत्व होता है । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र , शुभ भद्रा एवं चंद्रमा की अनुकूल स्थिति में किया गया व्रत , दान और भगवान विष्णु का स्मरण अनेक गुना फलदायी माना जाता है । यह तिथि केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि , संयम , सदाचार और भक्ति का दिव्य संदेश भी प्रदान करती है ।
पवित्र नगरी अमरकंटक में मोहिनी एकादशी के इस शुभ अवसर पर धर्म , अध्यात्म और सनातन संस्कृति की अद्भुत छटा दिखाई दी , जहां हर ओर श्रद्धा , भक्ति और पुण्य की अविरल धारा प्रवाहित होती रही ।
अमरकंटक में अनेक स्थानों से श्रद्धालु , पर्यटक रोजाना पहुंच रहे है , मां नर्मदा में स्नान और क्षेत्र का भ्रमण कर आनंदित हो उठते है ।
















































