अमरकंटक के बाबा कल्याण दास जी की अध्यक्षता में अयोध्या में होगा भव्य श्रीमद्भागवत कथा एवं महाविद्यालय लोकार्पण समारोह
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहेंगे शामिल ,
5 अक्टूबर को होगा नवीन महाविद्यालय भवन का उद्घाटन
संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित कल्याण सेवा आश्रम के प्रमुख संस्थापक वीतराग तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज की अध्यक्षता में पवित्र नगरी अयोध्या धाम में आगामी 5 अक्टूबर 2026 को एक भव्य धार्मिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है । इस आयोजन की अध्यक्षता अमरकंटक के सुप्रसिद्ध संत तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज करेंगे ।
श्री उदासीन संगत ऋषि आश्रम परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के साथ-साथ श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी संपन्न होगा । आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं एवं संत समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित रहेंगे जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे । दोनों अतिथियों के कर-कमलों द्वारा महाविद्यालय के नवीन भवन का उद्घाटन किया जाएगा ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वीतराग तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज जो अमरकंटक की आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं , श्रद्धालुओं को धर्म , संस्कृति और शिक्षा के महत्व का संदेश देंगे । वहीं विख्यात कथावाचक डॉ. स्वामी शिवानन्द दास जी महाराज अपनी मधुर वाणी से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे ।
आयोजन के संरक्षक एवं प्रेरणास्रोत महंत डॉ. स्वामी भरत दास जी महाराज के मार्गदर्शन में यह संपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ।
आयोजकों के अनुसार 27 सितंबर से 07 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में प्रतिदिन कथा , भजन-कीर्तन , संत समागम एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे । देश के विभिन्न राज्यों से संत-महात्माओं , विद्वानों एवं हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है ।
श्री उदासीन संगत ऋषि आश्रम परिवार ने देशभर के धर्मप्रेमियों , संतजनों एवं श्रद्धालुओं से इस पावन आयोजन में सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है । धार्मिक आस्था , संस्कृत शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समर्पित यह आयोजन अयोध्या धाम में एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी अवसर के रूप में देखा जा रहा ।
































































