अधिवक्ता अभिषेक पांडे की पैरवी पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर अनूपपुर को 10 दिन में भुगतान सुनिश्चित कराने के निर्देश

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अधिवक्ता अभिषेक पांडे की पैरवी पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर अनूपपुर को 10 दिन में भुगतान सुनिश्चित कराने के निर्देश

मुआवजा भुगतान मामले में हाईकोर्ट का अहम आदेश; भुगतान में देरी पर कलेक्टर, MPRDC और NHAI के अधिकारियों की व्यक्तिगत मौजूदगी के संकेत

अनूपपुर। मुआवजा राशि के भुगतान से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कलेक्टर अनूपपुर को भुगतान प्रक्रिया की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश WP No. 47340/2025, Gyan Singh and Others vs Union of India and Others में 12 अगस्त 2026 को पारित किया गया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने पैरवी की।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 17 जुलाई 2026 को पारित पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित मामले में कलेक्टर अनूपपुर व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि कलेक्टर, MPRDC अथवा NHAI, जैसा भी मामला हो, संबंधित भुगतान 10 दिनों के भीतर अर्जित ब्याज सहित कर दें।

NHAI और MPRDC की संयुक्त जिम्मेदारी पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान 17 जुलाई 2026 को पारित आदेश में संशोधन की मांग पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि NHAI Principal तथा MPRDC Agent के रूप में कार्य कर रहा है और भुगतान के संबंध में दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि MPRDC द्वारा भुगतान किया जाता है तो वह अपनी संविदात्मक व्यवस्था के अनुसार बाद में NHAI से उस राशि की वसूली कर सकता है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को भुगतान प्राप्त करने के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच ‘एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय’ भटकने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट की इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर NHAI और MPRDC के बीच आंतरिक व्यवस्था का खामियाजा मुआवजा पाने वाले याचिकाकर्ताओं को नहीं भुगतना पड़ेगा।

10 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो अधिकारियों को बुला सकता है कोर्ट

हाईकोर्ट ने आदेश में सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित 10 दिनों की अवधि में अर्जित ब्याज सहित भुगतान नहीं किया गया, तो न्यायालय कलेक्टर अनूपपुर, MPRDC के एमडी एवं NHAI के एमडी की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश देने के लिए बाध्य हो सकता है।

कोर्ट ने कलेक्टर अनूपपुर को भुगतान की प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सीधे कलेक्टर की निगरानी में आ गई है।

अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने उठाया भुगतान का मुद्दा

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने भुगतान व्यवस्था एवं पूर्व आदेश में संशोधन से संबंधित पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। आदेश में दर्ज है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि अश्वनी कुमार और अजिबुद्दीन को MPRDC द्वारा भुगतान किया जा चुका है, जिसके आधार पर Pay and Recover के सिद्धांत को लागू किए जाने की दलील रखी गई।

वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने न्यायालय को बताया कि संबंधित प्रावधानों के तहत भुगतान NHAI द्वारा किया जाना है और NHAI द्वारा मुआवजा राशि राज्य सरकार के पास पहले ही जमा की जा चुकी है।

SDM के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी

हाईकोर्ट ने आदेश में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि कलेक्टर अनूपपुर संबंधित SDM के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष कुछ समाचार पत्रों की कटिंग प्रस्तुत की गई थीं, जिनमें मुआवजा राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने का उल्लेख था। इस पर न्यायालय ने कलेक्टर को संबंधित मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हालांकि, समाचार पत्रों में प्रकाशित आरोपों को न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में घोषित नहीं किया गया है।

31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त 2026 को सूचीबद्ध किया है। इस दौरान भुगतान की स्थिति के साथ-साथ SDM के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मुआवजा भुगतान से जुड़े हितग्राहियों के मामले में प्रशासनिक स्तर पर तेजी आने की उम्मीद है। खासतौर पर कलेक्टर अनूपपुर को व्यक्तिगत रूप से भुगतान की निगरानी करने का निर्देश दिए जाने से आदेश की गंभीरता बढ़ गई है।

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे की पैरवी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुनवाई के दौरान भुगतान की जिम्मेदारी, NHAI और MPRDC के बीच Principal-Agent संबंध तथा याचिकाकर्ताओं को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के चक्कर लगाने से बचाने का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब निर्धारित समय सीमा में भुगतान और संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट पर सभी की नजरें रहेंगी।

 

 

 

 

 

 

अधिवक्ता अभिषेक पांडे की पैरवी पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर अनूपपुर को 10 दिन में भुगतान सुनिश्चित कराने के निर्देश

मुआवजा भुगतान मामले में हाईकोर्ट का अहम आदेश; कलेक्टर को व्यक्तिगत निगरानी के साथ कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

अनूपपुर। मुआवजा राशि के भुगतान से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कलेक्टर अनूपपुर को भुगतान प्रक्रिया की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश WP No. 47340/2025, Gyan Singh and Others vs Union of India and Others में 12 अगस्त 2026 को पारित किया गया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने पैरवी की।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 17 जुलाई 2026 को पारित पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित मामले में कलेक्टर अनूपपुर यह व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करेंगे कि कलेक्टर, मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) अथवा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), जैसा भी मामला हो, संबंधित भुगतान 10 दिनों के भीतर अर्जित ब्याज सहित कर दें।

भुगतान में देरी हुई तो अधिकारियों की व्यक्तिगत मौजूदगी का आदेश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो न्यायालय कलेक्टर अनूपपुर, MPRDC के एमडी और NHAI के संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश देने के लिए बाध्य हो सकता है।

कोर्ट ने यह भी माना कि NHAI प्रमुख संस्था (Principal) और MPRDC उसके एजेंट (Agent) के रूप में कार्य कर रहे हैं तथा दोनों की भुगतान को लेकर संयुक्त एवं पृथक जिम्मेदारी बनती है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि यदि MPRDC द्वारा भुगतान किया जाता है तो वह अपने संविदात्मक दायित्वों के अनुसार बाद में NHAI से राशि की वसूली कर सकता है।

अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने भुगतान व्यवस्था का मुद्दा उठाया

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने न्यायालय के समक्ष संबंधित भुगतान एवं पूर्व आदेश में संशोधन को लेकर पक्ष रखा। आदेश में दर्ज है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि अश्वनी कुमार और अजिबुद्दीन को MPRDC द्वारा भुगतान किया जा चुका है, जिसके आधार पर Pay and Recover के सिद्धांत को लागू किए जाने की दलील रखी गई।

वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने न्यायालय को बताया कि संबंधित प्रावधानों के तहत भुगतान की जिम्मेदारी NHAI की है और NHAI द्वारा मुआवजा राशि राज्य सरकार के पास पहले ही जमा की जा चुकी है।

SDM के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी

हाईकोर्ट ने आदेश में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि कलेक्टर अनूपपुर संबंधित SDM के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष कुछ समाचार पत्रों की कटिंग प्रस्तुत की गई थीं, जिनमें मुआवजा राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने का उल्लेख था। इस पर न्यायालय ने कलेक्टर को संबंधित मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हालांकि, समाचार पत्रों में प्रकाशित आरोपों को न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में घोषित नहीं किया गया है।

31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त 2026 को सूचीबद्ध किया है। इस दौरान भुगतान की स्थिति के साथ-साथ SDM के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मुआवजा भुगतान से जुड़े हितग्राहियों के मामले में प्रशासनिक स्तर पर तेजी आने की उम्मीद है। खासतौर पर कलेक्टर अनूपपुर को व्यक्तिगत रूप से भुगतान की निगरानी करने का निर्देश दिए जाने से आदेश की गंभीरता बढ़ गई है।

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे की पैरवी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनकी ओर से प्रस्तुत पक्ष और दस्तावेजों के आधार पर भुगतान व्यवस्था, जिम्मेदारी तय करने तथा संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की स्थिति न्यायालय के समक्ष आई।

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