अतिक्रमण हटाने के नाम पर खड़ी फसल पर चली जेसीबी, मकान तोड़ने का आरोप
नजूल तहसीलदार पर समय न देने के आरोप, अपर सत्र न्यायालय में मामला लंबित; 12 नवंबर को अगली सुनवाई, 6 दिन का समय मांगने के बावजूद कार्रवाई किए जाने का दावा
मनेंद्रगढ़। ग्राम लालपुर, तहसील मनेंद्रगढ़, जिला एमसीबी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीण पक्ष का आरोप है कि नजूल तहसीलदार विनीत कुमार सिंह द्वारा पर्याप्त समय दिए बिना खड़ी फसल पर जेसीबी चला दी गई तथा मकान को भी तोड़ दिया गया। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
प्राप्त दस्तावेज के अनुसार न्यायालय अनुविभागीय दंडाधिकारी मनेंद्रगढ़ के दांडिक प्रकरण क्रमांक 202506330400037/164 BNSS/2024-25 में इमरान अहमद विरुद्ध गणेश कुमार के मामले में पारित अंतिम आदेश दिनांक 2 सितंबर 2026 के आधार पर ग्राम लालपुर स्थित भूमि पर कब्जा दिलाए जाने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी। दस्तावेज में खसरा नंबर 80/4 रकबा 0.226 हेक्टेयर एवं 80/6 रकबा 1.031 हेक्टेयर, कुल 1.257 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख है।
नजूल तहसीलदार मनेंद्रगढ़ द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी पत्र में संबंधित मालजमादार को निर्देशित किया गया था कि आवेदक पक्ष को वादभूमि का कब्जा दिलाया जाए तथा निर्धारित तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे कार्रवाई के लिए समय तय किया गया था। पत्र में थाना प्रभारी मनेंद्रगढ़ को मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस बल एवं महिला बल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
वहीं प्रभावित पक्ष का कहना है कि उक्त भूमि पर खड़ी फसल थी और कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका दावा है कि उन्होंने कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टालने तथा लगभग 6 दिन का समय देने का अनुरोध किया था, ताकि न्यायालय में लंबित मामले में अपना पक्ष रखा जा सके, लेकिन समय नहीं दिया गया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार मामले को लेकर अपर सत्र न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है तथा स्टे के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आगामी 12 नवंबर 2026 को मामले में सुनवाई की तारीख निर्धारित है। आरोप है कि इसके बावजूद 6 नवंबर को कार्रवाई करते हुए खड़ी फसल पर जेसीबी चला दी गई और मकान को भी क्षतिग्रस्त/ध्वस्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई को लेकर अब प्रभावित परिवार न्यायालय की शरण में जाने की बात कह रहा है। उनका कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और स्टे आवेदन पर सुनवाई की तारीख 12 नवंबर निर्धारित है, तो उन्हें कम से कम सुनवाई तक समय दिया जाना चाहिए था।
हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई को लेकर जारी पत्र में न्यायालय के पूर्व आदेश के पालन में कब्जा दिलाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। कार्रवाई के दौरान वास्तविक स्थिति क्या थी, क्या संबंधित पक्ष को पर्याप्त अवसर दिया गया था और क्या न्यायालय में लंबित स्टे आवेदन का कार्रवाई पर कोई प्रभाव था, इन बिंदुओं पर प्रशासन का पक्ष सामने आना शेष है।
मामले में अब 12 नवंबर की न्यायालयीन सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




























