भरण-पोषण अधिनियम वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा का बना सशक्त माध्यम

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अनूपपुर 27 अक्टूबर 2026/ माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए सहयोग और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 प्रभावी है। अधिनियम के माध्यम से ऐसे वरिष्ठजन, जो अपनी आय से भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, अपने वयस्क बच्चों अथवा पात्र संबंधियों से भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

भरण-पोषण में आवश्यक सुविधाएं शामिल

अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठजनों के भरण-पोषण में समुचित भोजन, आश्रय, वस्त्र और चिकित्सा देखभाल जैसी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए विशेष अधिकरण की व्यवस्था की गई है। मध्यप्रदेश में यह अधिनियम 23 अगस्त 2008 से लागू है। इसका उद्देश्य वरिष्ठजनों की कठिनाइयों को दूर कर उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने में सहायता करना है।

उपेक्षा एवं परित्याग पर दंड का प्रावधान

अधिनियम के तहत माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा अथवा परित्याग करने पर दंड का प्रावधान है। इसके लिए तीन माह तक का कारावास अथवा पांच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। भरण-पोषण संबंधी सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र वरिष्ठ नागरिक संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी संरक्षण प्राप्त करने में सहायक है।

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