साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त मंच बना कोरिया साहित्य महोत्सव : प्रभात मिश्रा

---Advertisement---
  • राजभाषा आयोग अध्यक्ष ने दूसरे दिन के आयोजन में की शिरकत, 147 साहित्यकारों और कलाकारों सहित 16 समाजसेवियों का हुआ सम्मान
  • दिल्ली के कवि मुरारी मंडल की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, काव्य पाठ और संगीत की प्रस्तुतियों से देर रात तक गुलजार रहा महोत्सव

बैकुंठपुर। साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने वाले कोरिया साहित्य महोत्सव के चतुर्थ संस्करण का दूसरा दिन साहित्यिक विमर्श, काव्य पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतिभाओं के सम्मान के नाम रहा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कार्यक्रम में शामिल होकर दीप प्रज्ज्वलन के साथ दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कोरिया की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध बताते हुए कहा कि यह महोत्सव क्षेत्र की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी में साहित्य और सृजन के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद, जिला पंचायत उपाध्यक्ष वंदना राजवाड़े, सदस्य गीता राजवाड़े और वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि महोत्सव के पहले दिन छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आयोजन के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया था।

कोरिया की धरती ने साहित्यिक चेतना को दी नई दिशा

समारोह को संबोधित करते हुए प्रभात मिश्रा ने कहा कि कोरिया की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता तक सीमित नहीं है बल्कि यहां की समृद्ध साहित्यिक और वैचारिक परंपरा भी इसकी विशिष्ट पहचान है। इस क्षेत्र की सृजनशील भूमि ने लंबे समय से साहित्यिक चेतना को पोषित किया है। उन्होंने भवानीप्रसाद मिश्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और विमल मित्र जैसे साहित्यिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कोरिया की साहित्यिक परंपरा और वैचारिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने के साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का माध्यम भी है। समाज में मौजूद लोक परंपराओं की मूल भावना को बनाये रखने और सामाजिक जीवन में आने वाली विसंगतियों को सामने लाने में साहित्यकारों की अहम भूमिका रहती है।
प्रभात मिश्रा ने कहा कि कोरिया साहित्य महोत्सव इस विरासत को आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने, वरिष्ठ साहित्यकारों से सीखने और व्यापक साहित्यिक जगत से जुड़ने का अवसर मिलता है।

राष्ट्र निर्माण में साहित्य और विचारों की अहम भूमिका

देश के विभिन्न राज्यों में भ्रमण कर वैचारिक जागरूकता के लिये कार्य कर रहे वरिष्ठ विचारक नागेंद्र वशिष्ठ ने भी महोत्सव में अपने विचार साझा किये। उन्होंने साहित्यकारों और कलाकारों से राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकारों और सकारात्मक विचारों को अपनी रचनाओं का आधार बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि साहित्य किसी समाज की सोच को आकार देने और उसके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रचनाकारों की जिम्मेदारी केवल अपनी अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं होती बल्कि उनकी रचनाएं समाज में चेतना, संवेदना और सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बन सकती हैं।

आयोजन को बताया क्षेत्र की सांस्कृतिक उपलब्धि

विशिष्ट अतिथियों ने भी कोरिया साहित्य महोत्सव के आयोजन की सराहना की। एसईसीएल के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद, जिला पंचायत उपाध्यक्ष वंदना राजवाड़े और जिला पंचायत सदस्य गीता राजवाड़े ने कहा कि इस तरह के आयोजन क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पहचान देते हैं।
उन्होंने कहा कि महोत्सव स्थानीय और उभरते हुए रचनाकारों को अनुभवी साहित्यकारों के साथ मंच साझा करने का अवसर प्रदान करता है। इससे नई प्रतिभाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी कला को निखारने की प्रेरणा मिलती है।

147 कलाकारों और साहित्यकारों का सम्मान, समाजसेवियों को भी मिला मंच

महोत्सव के दूसरे दिन साहित्य और कला के साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालयीन विद्यार्थियों और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
आयोजन के दौरान संस्था के संरक्षक नरेश सोनी के साथ अतिथियों ने कोरिया के 38 नवोदित रचनाकारों और विभिन्न जिलों से पहुंचे 41 कलाकारों को सम्मानित किया। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकारों, श्रमिक हितों के लिये सक्रिय नेताओं और समाजसेवियों के योगदान को भी मंच से सराहा गया।
आयोजकों के अनुसार दो दिवसीय कोरिया साहित्य महोत्सव में कुल 147 साहित्यकारों एवं कलाकारों और 16 समाजसेवियों को सम्मान प्रदान किया गया। इस पहल के माध्यम से साहित्यिक गतिविधियों के साथ सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाले लोगों को भी प्रोत्साहित किया गया।

मुरारी मंडल की काव्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

महोत्सव की काव्य त्रिवेणी में दिल्ली से पहुंचे प्रख्यात रचनाकार मुरारी मंडल ने अपनी सहज और प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनकी रचनाओं पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं। मुंगेली के देवेंद्र परिहार और घरघोड़ा के हर्षराज हर्ष ने भी अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को प्रभावित किया।
इससे पहले युवाओं के कवि सम्मेलन और सियाधेश म्यूजिक बैंड की संगीत प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बनाया। साहित्य, कविता और संगीत के इस संगम में स्थानीय लोगों सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटे साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी

संस्कृति विभाग, स्काईहाइट्स, साईनाथ फाउंडेशन और एसईसीएल के सहयोग से टीम अभिव्यक्ति द्वारा आयोजित महोत्सव में सरगुजा, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहित्यकार, कलाकार और संस्कृतिकर्मी पहुंचे। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डीके उपाध्याय, रमेश गुप्ता, सुंदरलाल तिवारी, डॉ. ओंकार साहू, तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इसके अलावा राजेश तिवारी, शैलेश तिवारी, सिद्धार्थ खैरवार, चंद्रा चर्चित, राजेंद्र सोनी, योगेंद्र मिश्रा, शैलेष शिवहरे, भानू पाल, अमित श्रीवास्तव, अनूप बड़ेरिया, आशीष राज सिंघानिया, सुनील शर्मा, आयुष नामदेव, तारा पांडे, अलीशा शेख, योगेश गुप्ता, हरिकांत अग्निहोत्री, विनय तिवारी और मिराज अली सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का मंच संचालन सुनील शर्मा ने किया जबकि अंत में रुद्र मिश्रा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सम्मान समारोह के साथ महोत्सव ने कोरिया की रचनात्मक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment