- सतीश उपाध्याय बोले – अमृत की तलाश बाहर नहीं अपने भीतर करें, प्रेम, करुणा और क्षमा से ही जीवन बनेगा सार्थक
मनेन्द्रगढ़। भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक शरद पूर्णिमा पर्व पर एमसीबी योग सेवा समिति की ओर से सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आत्मिक चिंतन और योग साधना का आयोजन किया गया। वरिष्ठ योग साधकों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में शरद पूर्णिमा की परंपराओं के साथ जीवन में सकारात्मकता, आत्मशुद्धि और मानवीय मूल्यों के महत्व पर विचार साझा किये गये। कार्यक्रम के समापन पर योग साधकों के बीच अमृतमयी खीर का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए योग समिति के जिला प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने कहा कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में खीर रखने और उसमें अमृत तत्व की कल्पना करने की परंपरा भारतीय संस्कृति की गहरी आध्यात्मिक सोच को दर्शाती है। यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच आत्मीय संबंध का संदेश देने के साथ ही जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का महत्व भी समझाता है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा को केवल उत्सव और पारंपरिक रीति रिवाजों तक सीमित नहीं रखना चाहिये बल्कि इसके आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिये। यदि मन ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार जैसी नकारात्मक भावनाओं से घिरा रहेगा तो बाहरी सुख सुविधाएं भी वास्तविक संतुष्टि नहीं दे सकतीं। मन की निर्मलता ही व्यक्ति को आंतरिक शांति और आत्मिक संतोष की ओर ले जाती है।
आंतरिक शांति में छिपा है वास्तविक अमृत
सतीश उपाध्याय ने कहा कि आज के तनावपूर्ण और अशांत वातावरण में मनुष्य बाहरी साधनों में सुख और शांति तलाश रहा है जबकि वास्तविक अमृत उसकी अपनी चेतना में मौजूद है। अपने भीतर प्रेम, करुणा, क्षमा और सेवा भाव को विकसित करना ही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है। शरद पूर्णिमा का वास्तविक संदेश भी यही है कि जिस प्रकार हम अमृतमयी खीर की परंपरा से जुड़ते हैं उसी प्रकार अपने विचारों और व्यवहार को भी पवित्र बनाने का संकल्प लें।
उन्होंने कहा कि प्रकृति की सुंदरता और चंद्रमा की शीतलता तभी जीवन में वास्तविक आनंद का अनुभव करा सकती है जब मनुष्य का अंतर्मन शांत और संवेदनशील हो। दूसरों के प्रति सद्भाव, सहयोग और मानवता का भाव अपनाकर ही समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित किया जा सकता है।
इस अवसर पर योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े नियमित योग साधकों और साधिकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण निशी, योग साधक दिवाकर मिश्रा, भैरव प्रसाद केसरवानी, पवन पोद्दार, धर्मराज वर्मा, बलवीर कौर, जगदंबा अग्रवाल, विकास कुमार गोयल, राकेश अग्रवाल, पिंकी सलूजा, रेखा उपाध्याय, विमला यादव और कविता मंगतानी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में शरद पूर्णिमा की परंपरा के अनुरूप दूधिया चांदनी से जुड़ी अमृतमयी खीर का सभी योग साधकों के बीच वितरण किया गया। आयोजन ने भारतीय संस्कृति की परंपराओं के साथ आत्मचिंतन, सद्भाव और आंतरिक शुद्धता का संदेश दिया।






































































