ईसीएल ने वित्तीय सुधार के साथ पकड़ी विकास की रफ्तार, 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

---Advertisement---

ईसीएल ने वित्तीय सुधार के साथ पकड़ी विकास की रफ्तार, 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

52.085 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद अब लाभप्रदता पर जोर, घाटे वाली खदानों के लिए बनाई गई खदान-विशिष्ट रणनीति

19 खदानों में मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी, 7 का एकीकरण और 11 खदानों की रणनीतिक बंदी की तैयारी

सांकतोड़िया (आसनसोल), 3 सितंबर। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने वित्तीय एवं परिचालन सुधार की दिशा में अपनी रणनीति को नए सिरे से गति देते हुए वित्त वर्ष 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी का फोकस अब उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लाभप्रदता, लागत नियंत्रण, तकनीकी नवाचार, खदानों की उत्पादकता और सतत खनन पर है। यह जानकारी ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने सांकतोड़िया स्थित ईसीएल मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।

प्रेस वार्ता के दौरान सीएमडी ने कंपनी की मौजूदा स्थिति, वित्तीय चुनौतियों, खदानों के प्रदर्शन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, विद्युत चोरी से होने वाली क्षति, अवैध खनन, सुरक्षा व्यवस्था, वैज्ञानिक खदान बंदी तथा भविष्य की उत्पादन रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईसीएल आने वाले वर्षों में परिचालन दक्षता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए अपनी स्थिति को और मजबूत करेगी।

52.085 मिलियन टन रहा अब तक का सर्वाधिक उत्पादन

ईसीएल के प्रदर्शन की जानकारी देते हुए सतीश झा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 52.085 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया, जो कंपनी का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन है। हालांकि रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद कंपनी को इस अवधि में वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा और करीब 1,257 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज हुआ।

उन्होंने घाटे के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बाजार की बदलती परिस्थितियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार दिसंबर 2025 से पावर-ग्रेड कोयले की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश की ऊर्जा आवश्यकताओं में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए कोयला उत्पादन एवं आपूर्ति की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

अप्रैल-जून तिमाही में दिखा सुधार का असर

ईसीएल के लिए राहत की महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने कर-पूर्व लाभ (Profit Before Tax) की स्थिति हासिल कर ली है। सीएमडी ने इसे कंपनी द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक उपायों और परिचालन पर बढ़ाए गए फोकस का सकारात्मक परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि कंपनी घाटे को कम करने और खदानों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खदानों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर प्रत्येक खदान के लिए अलग रणनीति तैयार की गई है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके और उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जा सके।

57 खदानें घाटे में, 20 खदानें मुनाफे में

ईसीएल की मौजूदा खदानों की स्थिति बताते हुए सीएमडी ने कहा कि घाटे में संचालित खदानों की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष कमी आ रही है। वर्तमान में 57 खदानों को घाटे में संचालित खदानों के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि 20 खदानें लाभप्रद रूप से संचालित हो रही हैं।

घाटे वाली खदानों के प्रदर्शन में सुधार के लिए कंपनी ने कई स्तरों पर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 19 खदानों में मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी लागू करने, 7 खदानों के एकीकरण (Amalgamation), 4 खदानों में HOE अनुबंध शुरू करने तथा 11 खदानों की रणनीतिक बंदी जैसे कदम शामिल हैं। शेष खदानों में लागत नियंत्रण एवं परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

सीएमडी ने इन पहलों को जमीन पर उतारने में ईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी की सुधार यात्रा में कर्मचारियों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।

रानीगंज पुनर्वास योजना पर 2,661 करोड़ रुपये का प्रावधान

खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन को लेकर भी ईसीएल की योजना को प्रेस वार्ता में प्रमुखता से रखा गया। सतीश झा ने रानीगंज पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना-2009 का उल्लेख करते हुए बताया कि पुनर्वास के लिए 138 स्थलों की पहचान की गई है।

इस योजना के तहत पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन संबंधी उपायों के क्रियान्वयन के लिए करीब 2,661 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लागू प्रावधानों के अनुसार वैध स्वामित्व अधिकार रखने वाले पात्र व्यक्तियों को मुआवजा एवं आवास संबंधी लाभ दिए जाने का प्रावधान है। वहीं अन्य प्रभावित निवासियों को निर्धारित पुनर्वास व्यवस्था के अनुरूप लाभ उपलब्ध कराया जाता है।

बिजली चोरी से हर साल करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान

प्रेस वार्ता में विद्युत चोरी एवं अवैध विद्युत उपयोग से होने वाली वित्तीय क्षति का मुद्दा भी सामने आया। सीएमडी ने बताया कि ईसीएल का वार्षिक विद्युत व्यय करीब 550 करोड़ रुपये है, लेकिन बिजली चोरी एवं पिलफरेज के कारण लगभग 250 करोड़ रुपये की वार्षिक हानि होती है।

उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी निवारक कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। विद्युत चोरी पर प्रभावी नियंत्रण को कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारने के महत्वपूर्ण उपायों में से एक माना जा रहा है।

ड्रोन और ICCC से अवैध खनन पर निगरानी

खदान सुरक्षा और अवैध खनन पर चर्चा करते हुए सीएमडी ने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से रैट-होल माइनिंग की घटनाओं पर लगभग पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जा चुका है। ईसीएल ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ तकनीक आधारित निगरानी को भी बढ़ावा दिया है।

अवैध खनन और कोयला निकासी पर नजर रखने के लिए ड्रोन निगरानी तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और CISF कर्मियों की तैनाती बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

वैज्ञानिक खदान बंदी और नई तकनीकों पर जोर

ईसीएल अब खदानों के संचालन के साथ-साथ उनकी वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित बंदी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रेस वार्ता में Scientific Mine Closure और सतत खनन पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कंपनी पारंपरिक सैंड स्टोविंग पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खदानों में बने रिक्त स्थानों यानी Mine Voids को भरने के लिए वैकल्पिक तकनीकों और नवीन विधियों की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इसका उद्देश्य खदान बंदी के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और खनन क्षेत्रों के दीर्घकालिक पुनर्विकास को सुनिश्चित करना है।

सतत खनन के साथ नॉन-कोकिंग कोयला संसाधनों का दोहन

सीएमडी ने कहा कि ईसीएल देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने नॉन-कोकिंग कोयला संसाधनों का वैज्ञानिक, जिम्मेदार और सतत दोहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी का प्रयास है कि उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावित समुदायों के हितों के बीच संतुलन कायम रखा जाए।

उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति केवल उत्पादन के आंकड़े बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि खदानों की आर्थिक व्यवहार्यता, लागत दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता को भी समान महत्व दिया जाएगा।

81 मिलियन टन के लक्ष्य की ओर बढ़ेगी ईसीएल

प्रेस वार्ता के समापन पर सतीश झा ने कहा कि ईसीएल का परिवर्तन और भविष्य का विकास परिचालन दक्षता, वित्तीय अनुशासन, कर्मचारी सहभागिता, तकनीकी नवाचार और खनन प्रभावित समुदायों के उत्तरदायी पुनर्वास पर आधारित होगा।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने वित्तीय सुधार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और आगामी वर्षों में इस प्रक्रिया को और गति दी जाएगी। रिकॉर्ड उत्पादन के बाद अब कंपनी का अगला बड़ा लक्ष्य उत्पादन क्षमता के साथ लाभप्रदता को मजबूत करना है। 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

ईसीएल प्रबंधन का मानना है कि खदान-विशिष्ट रणनीतियों, नई तकनीकों, लागत नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से कंपनी अपने वर्तमान प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए आने वाले वर्षों में उत्पादन एवं वित्तीय दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment