एनसीएल की ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ बनी जीवनरक्षक पहल

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एनसीएल की ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ बनी जीवनरक्षक पहल

3 हजार से अधिक स्कूली विद्यार्थी बने ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’, सीपीआर से लेकर सर्पदंश तक का सीख रहे व्यावहारिक प्रशिक्षण

 

सिंगरौली। भारत सरकार की मिनीरत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा स्कूली विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक ज्ञान और जीवन रक्षक कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ पहल प्रभावी रूप से आगे बढ़ रही है। कार्यक्रम के तहत अब तक 56 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 3,086 स्कूली विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सकीय सहायता पहुंचने से पहले आवश्यक और सही प्राथमिक उपचार करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

एनसीएल की इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में सक्षम ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में विकसित करना है। दुर्घटना, चोट अथवा अचानक उत्पन्न हुई किसी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में यदि आसपास मौजूद व्यक्ति सही तरीके से प्राथमिक सहायता प्रदान कर सके तो कई परिस्थितियों में गंभीर परिणामों को टाला जा सकता है।

सीपीआर से लेकर सर्पदंश तक की दी जा रही जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले प्राथमिक उपचार के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। इसमें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रमुख रूप से शामिल है। विद्यार्थियों को यह समझाया जा रहा है कि किसी व्यक्ति की सांस या हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति में चिकित्सा सहायता पहुंचने तक किस प्रकार तत्काल कदम उठाए जा सकते हैं।

इसके अलावा सड़क दुर्घटना के दौरान तत्काल प्राथमिक उपचार, सर्पदंश की स्थिति में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियां, जलने की स्थिति में प्राथमिक उपचार तथा गंभीर चोट लगने पर तत्काल राहत उपलब्ध कराने के संबंध में भी विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को रक्तचाप की जांच और सामान्य रोगों की पहचान से संबंधित प्राथमिक जानकारी भी प्रदान की जा रही है। इस प्रकार कार्यक्रम में सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी वास्तविक परिस्थितियों में सीखी गई जानकारी का उचित उपयोग कर सकें।

आपात स्थिति में सही कदम उठाने पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है कि किसी दुर्घटना या आपातकालीन परिस्थिति में घबराने के बजाय स्थिति का आकलन करते हुए सही कदम उठाना आवश्यक है। चिकित्सा सहायता पहुंचने से पहले दिया गया उचित प्राथमिक उपचार कई बार घायल अथवा गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

विद्यार्थियों को यह भी बताया जा रहा है कि प्राथमिक उपचार का उद्देश्य चिकित्सकीय उपचार का विकल्प बनना नहीं, बल्कि चिकित्सा सहायता मिलने तक व्यक्ति की स्थिति को स्थिर रखने और आगे होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करना है।

फेज-1 में 3,200 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

गौरतलब है कि एनसीएल ने ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ के फेज-1 के अंतर्गत अपने पोषित विद्यालयों में अध्ययनरत 3,200 विद्यार्थियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की दिशा में अब तक 3,086 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

एनसीएल की यह पहल विद्यालयीन शिक्षा को महज पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे व्यावहारिक जीवन कौशल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। प्राथमिक उपचार और जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न केवल स्वयं आपात स्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने में सक्षम होंगे, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने परिवार, सहपाठियों और आसपास के लोगों की भी तत्काल मदद कर सकेंगे।

जिम्मेदार और सक्षम नागरिक तैयार करने की दिशा में कदम

‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग 2.0’ के माध्यम से एनसीएल विद्यार्थियों में जागरूकता, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास कर रही है। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थी किसी दुर्घटना या आपात स्थिति में मूकदर्शक बने रहने के बजाय आवश्यक सावधानी के साथ प्राथमिक सहायता प्रदान करने के लिए अधिक सक्षम होंगे।

विद्यालयों में इस प्रकार के जीवन रक्षक प्रशिक्षण से बच्चों में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ समाज में भी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की सामूहिक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। 3,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने की उपलब्धि के साथ एनसीएल की यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है।

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