कल्याण भवन (एचआरडी) बीसीसीएल में विशेष कार्यशाला-सह-संवादात्मक सत्र का आयोजन

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कल्याण भवन (एचआरडी) में आज कोयला भवन मुख्यालय एवं कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों के लिए ‘कृतज्ञता के साथ अतीत पर एक नज़र’ (Looking Back with Gratitude) विषय पर एक विशेष कार्यशाला-सह-संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निदेशक (मानव संसाधन) श्री मुरली कृष्ण रमैया ने बतौर मुख्य अतिथि सहभागिता करते हुए उपस्थित अधिकारियों के साथ विषय पर सार्थक संवाद किया तथा मानव संसाधन प्रबंधन, नेतृत्व कौशल एवं प्रभावी नेतृत्व में कृतज्ञता जैसे मानवीय मूल्यों की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री रमैया के औपचारिक स्वागत से हुई। महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद ने उन्हें शॉल, श्रीफल एवं पुष्प-गुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। स्वागत संबोधन में श्री सुधाकर प्रसाद ने सत्र की रूप-रेखा एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री रमैया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित करते हुए कंपनी में उनके कार्यकाल को प्रेरणास्पद बताया।

तकनीकी सत्र में श्री रमैया ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से कृतज्ञता के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। ‘द आइसबर्ग ऑफ ग्रैटिट्यूड’, ‘Being grateful to people who stood beside you in period of crisis’ तथा ‘Being grateful for whatever you have’ जैसे प्रेरक विचारों के माध्यम से उन्होंने अधिकारियों को उन लोगों, सहयोग एवं अनुभवों के प्रति कृतज्ञ रहने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने उनके जीवन एवं कार्यक्षेत्र में सकारात्मक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता नेतृत्व में संवेदनशीलता, विनम्रता, सकारात्मक सोच, पारस्परिक सम्मान एवं विश्वास को मजबूत करती है और एक स्वस्थ एवं सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

संवादात्मक सत्र में अधिकारियों ने विषय से संबंधित अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। श्री रमैया ने अपने दीर्घ व्यावसायिक अनुभव के आधार पर अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए मानवीय मूल्यों, टीम भावना, संवाद एवं सहयोग को प्रभावी नेतृत्व का अभिन्न हिस्सा बताया।

इस अवसर पर महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद, विभागाध्यक्ष (सीएसआर/आईआर) श्री सुरेन्द्र भूषण सहित मानव संसाधन निदेशालय के अंतर्गत कोयला भवन मुख्यालय के महाप्रबंधकगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) तथा एचआर विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री सफूरा रुबाब ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुमित कुमार एवं अन्य का विशेष योगदान रहा।

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कार्यक्रम की शुरुआत श्री रमैया के औपचारिक स्वागत से हुई। महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद ने उन्हें शॉल, श्रीफल एवं पुष्प-गुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। स्वागत संबोधन में श्री सुधाकर प्रसाद ने सत्र की रूप-रेखा एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री रमैया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित करते हुए कंपनी में उनके कार्यकाल को प्रेरणास्पद बताया।

तकनीकी सत्र में श्री रमैया ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से कृतज्ञता के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। ‘द आइसबर्ग ऑफ ग्रैटिट्यूड’, ‘Being grateful to people who stood beside you in period of crisis’ तथा ‘Being grateful for whatever you have’ जैसे प्रेरक विचारों के माध्यम से उन्होंने अधिकारियों को उन लोगों, सहयोग एवं अनुभवों के प्रति कृतज्ञ रहने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने उनके जीवन एवं कार्यक्षेत्र में सकारात्मक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता नेतृत्व में संवेदनशीलता, विनम्रता, सकारात्मक सोच, पारस्परिक सम्मान एवं विश्वास को मजबूत करती है और एक स्वस्थ एवं सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

संवादात्मक सत्र में अधिकारियों ने विषय से संबंधित अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। श्री रमैया ने अपने दीर्घ व्यावसायिक अनुभव के आधार पर अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए मानवीय मूल्यों, टीम भावना, संवाद एवं सहयोग को प्रभावी नेतृत्व का अभिन्न हिस्सा बताया।

इस अवसर पर महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद, विभागाध्यक्ष (सीएसआर/आईआर) श्री सुरेन्द्र भूषण सहित मानव संसाधन निदेशालय के अंतर्गत कोयला भवन मुख्यालय के महाप्रबंधकगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) तथा एचआर विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री सफूरा रुबाब ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुमित कुमार एवं अन्य का विशेष योगदान रहा।

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